By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 27, 2026
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बुजुर्ग दंपति को ठगों के एक गिरोह ने करीब तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसाकर रखा और उनसे 22 लाख रुपये की ठगी कर ली। पुलिस के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि पीड़ित दंपति इस कदर डरा हुआ था कि ठगों के कहने पर वे आंध्र प्रदेश से भोपाल लौटे और अपने जेवरात गिरवी रखकर 22 लाख रुपये का ऋण लिया तथा ठगों द्वारा बताए गए खातों में रकम अंतरित कर दी।
वे पीड़ितों को डिजिटल रूप से बंधक बनाकर उन पर ऑनलाइन धनराशि अंतरित करने का दबाव बनाते हैं। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) आलोक श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में कहा कि इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है और जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंचेगी।
पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि आरोपियों द्वारा ठगी में इस्तेमाल किए गए व्हाट्सऐप नंबर और पांच अलग-अलग बैंक खातों में हुए लेनदेन की जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान और उनके बैंक खातों तक पहुंचने के लिए सभी संभावित रास्ते तलाशे जा रहे हैं। पीड़ित दंपति की पहचान भोपाल के कोलार क्षेत्र के बीमाकुंज निवासी निजी कंपनी से सेवानिवृत्त कर्मचारी नरसिम्हा राव (66) और उनकी पत्नी सुवर्णा लक्ष्मी राव (63) के रूप में हुई है।
दोनों मूल रूप से आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले के रहने वाले हैं। नरसिम्हा राव ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया कि ठगों की ओर से उनकी पत्नी को पहला फोन 19 मई को आया था, जब वे आंध्र प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव में थे। उन्होंने कहा कि फोन करने वाले ने कथित तौर पर खुद को दिल्ली के दरियागंज पुलिस थाने का अधिकारी बताया और कहा कि उनकी पत्नी का नाम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उद्योगपति नरेश गोयल के खिलाफ दर्ज धनशोधन मामले से जुड़ा हुआ है तथा उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।
आरोपियों ने दंपति को धमकी दी कि यदि उन्होंने इस बारे में किसी से बात की तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। नरसिम्हा राव ने बताया कि आरोपियों ने उनकी पत्नी को इस मामले में जमानत दिलाने के लिए पैसे मांगे और रकम नहीं देने पर उनकी पूरी संपत्ति जब्त करने की धमकी दी। उन्होंने बताया कि जब दंपति ने पैसे नहीं होने की बात कही तो ठगों ने उन्हें भोपाल लौटने और गोल्ड लोन (सोना गिरवी रखकर कर्ज लेना) लेने के लिए मजबूर किया।
राव ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ 11 जून को भोपाल पहुंचे और यहां भी जालसाजों ने वीडियो कॉल के जरिए लगातार उन पर निगरानी रखी। दबाव में आकर राव ने 12 जून को अपने सोने के आभूषणों के बदले 22 लाख रुपये का ऋण लिया और उसी दिन धोखेबाजों द्वारा बताए गए खातों में रकम अंतरित कर दी। राव ने बताया कि आरोपियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी पत्नी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा और एक सप्ताह के भीतर पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।
हालांकि, पैसे वापस नहीं किए गए और फोन करने वाले दंपति को लगातार धमकाते रहे। राव और उनकी पत्नी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि लंबे समय तक उत्पीड़न और चौबीसों घंटे वीडियो कॉल के जरिए निगरानी से वे इतने सदमे में आ गए थे कि उन्होंने अपना जीवन समाप्त करने के बारे में भी सोचा। नरसिम्हा राव ने बताया कि उन्हें धोखाधड़ी का अंदाजा 23 जुलाई को हुआ, जब उन्होंने परिवार के एक सदस्य को घटना के बारे में बताया।
परिवार के सदस्य ने मामले की पड़ताल की तो पता चला कि कथित गिरफ्तारी वारंट और अन्य अदालती आदेश पूरी तरह फर्जी थे। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने इस धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया और 23 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई।