By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 11, 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को शहरी सहकारी बैंकों के लिए ऋण नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया। इसमें शहरी सहकारी बैंकों के लिए कुल परिसंपत्ति में असुरक्षित माने जाने वाले यानी बिना गारंटी वाले कर्ज का हिस्सा दोगुना कर 20 प्रतिशत तक करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। शहरी सहकारी बैंकों के लिए ऋण नियमों की समीक्षा के मसौदे के अनुसार, केंद्रीय बैंक व्यक्तिगत ऋण सीमा बढ़ाने और असुरक्षित ऋणों की परिको तर्कसंगत बनाने, इन ऋणों की व्यक्तिगत सीमा बढ़ाने और ऐसे कर्ज के लिए कुल सीमा को संशोधित करने का प्रस्ताव कर रहा है।
तीसरे और चौथे स्तर की शहरी सहकारी समितियों (यूसीबी) के लिए आवास ऋण की अवधि और स्थगन संबंधी आवश्यकताओं को विनियमन से मुक्त करने का प्रस्ताव है। आरबीआई ने इस महीने की मौद्रिक नीति समीक्षा में शहरी सहकारी बैंकों के लिए ऋण मानदंडों की समीक्षा की घोषणा की थी। मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि यूसीबी की प्रबंधन और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के लिए, केंद्रीय बैंक मिशन-सक्षम (सहकारी बैंक क्षमता निर्माण) शुरू करेगा। मल्होत्रा ने कहा, ‘‘इस मिशन का उद्देश्य यूसीबी से जुड़े 1.4 लाख से अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करना है।