By नीरज कुमार दुबे | Mar 16, 2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में एलपीजी संकट की स्थिति ने देशभर में आम लोगों से लेकर उद्योगों तक को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हालांकि सरकार द्वारा घबराहट में की जा रही बुकिंग को रोकने के लिए चलाए गए अभियान का असर अब दिखने लगा है, लेकिन गैस आपूर्ति को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में एलपीजी सिलिंडर की घबराहट में की जा रही बुकिंग में कमी आई है। शुक्रवार को जहां घरेलू एलपीजी की बुकिंग करीब अठासी लाख अस्सी हजार तक पहुंच गई थी, वहीं शनिवार को यह घटकर लगभग सतहत्तर लाख रह गई। सरकार का कहना है कि लोगों से अनावश्यक बुकिंग नहीं करने की अपील का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।
इसी के साथ ऑनलाइन बुकिंग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले जहां लगभग चौरासी प्रतिशत बुकिंग ऑनलाइन हो रही थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब सत्तासी प्रतिशत हो गई है। हम आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में अत्यधिक कॉल आने के कारण बुकिंग व्यवस्था प्रभावित हो गई थी और कई उपभोक्ताओं को गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा था। हालांकि मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी भी गैस वितरक के पास पूरी तरह गैस खत्म होने की स्थिति सामने नहीं आई है और नियमित आपूर्ति बनाए रखने के लिए व्यवस्था की जा रही है।
हम आपको बता दें कि एलपीजी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए उन उपभोक्ताओं पर सख्ती की है जिनके पास पाइप गैस और एलपीजी दोनों कनेक्शन हैं। सरकार ने ऐसे उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन घरों में पाइप गैस उपलब्ध है उन्हें अब सार्वजनिक तेल कंपनियों से घरेलू एलपीजी सिलिंडर नहीं दिया जाएगा। यह निर्णय आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अधिसूचना जारी कर लागू किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू एलपीजी की उपलब्धता उन परिवारों तक सुनिश्चित की जा सकेगी जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है।
इस बीच, सभी घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित जैविक सत्यापन यानी ई-केवाईसी भी अनिवार्य कर दिया गया है। उपभोक्ता अपने तेल विपणन कंपनी के मोबाइल एप और आधार एप के माध्यम से घर बैठे यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता अपने गैस वितरक से भी संपर्क कर सकते हैं।
उधर, एलपीजी संकट का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है बल्कि होटल, भोजनालय और उद्योग भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति को घटाकर केवल बीस प्रतिशत कर दिया है। इसके कारण कई शहरों में होटल और रेस्तरां को संचालन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कई बड़े होटल और रेस्तरां अब लकड़ी का उपयोग कर खाना बना रहे हैं, जबकि छोटे भोजनालयों के लिए ऐसा करना संभव नहीं है। कई जगह मेन्यू में से व्यंजनों की सूची घटा दी गई है और कम समय में बनने वाले व्यंजन पर जोर दिया जा रहा है।
उधर, विजयवाड़ा में गैस की कमी के कारण होटल और छोटे भोजनालयों ने खाने की कीमतें बढ़ा दी हैं क्योंकि उन्हें ब्लैक मार्केट से महंगे दाम पर सिलिंडर खरीदने पड़ रहे हैं। बेंगलुरु में भी होटल उद्योग को बड़ा झटका लगा है। होटल संघ के अनुसार शहर में होटल और रेस्तरां के कारोबार में लगभग पच्चीस से तीस प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। कई स्थानों पर तले हुए व्यंजन और स्नैक्स को मेन्यू से हटा दिया गया है तथा काम के घंटे भी कम कर दिए गए हैं।
भोपाल में स्ट्रीट फूड कारोबार भी इस संकट से प्रभावित हुआ है। पानी पूरी और अन्य ठेले लगाने वाले विक्रेताओं का कारोबार लगभग चालीस प्रतिशत तक घट गया है क्योंकि व्यावसायिक गैस सिलिंडर मिलना मुश्किल हो गया है। कई विक्रेता अस्थायी रूप से अपना काम बंद करने को मजबूर हो गए हैं।
बिहार की राजधानी पटना में काम करने वाले मजदूरों के लिए यह संकट और भी गंभीर हो गया है। किराए के कमरों में रहने वाले कई मजदूर अब लकड़ी या अन्य अस्थायी ईंधन का सहारा लेकर खाना बना रहे हैं। निर्माण स्थलों से बची लकड़ियों का उपयोग ईंधन के रूप में किया जा रहा है। कई मजदूरों का कहना है कि उन्हें घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है और कई बार ब्लैक मार्केट से बहुत महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है।
उधर, उद्योग जगत भी इससे प्रभावित हुआ है। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद ने तमिलनाडु सरकार से मांग की है कि वस्त्र निर्यात उद्योग को भी बीस प्रतिशत व्यावसायिक गैस आवंटन में शामिल किया जाए। परिषद का कहना है कि रंगाई, धुलाई और फिनिशिंग जैसे कई उत्पादन चरण एलपीजी पर निर्भर हैं और गैस की कमी से छोटे तथा मध्यम उद्योगों की उत्पादन प्रक्रिया बाधित हो रही है। इसके साथ ही एलपीजी संकट का असर सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों तक भी पहुंच गया है। कई बड़ी कंपनियों के कार्यालय परिसरों में कैंटीन का मेन्यू घटा दिया गया है। कुछ स्थानों पर कर्मचारियों से घर से भोजन लाने की सलाह दी गई है।
इसी बीच, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बनी हुई है। हालांकि फुजैराह तेल टर्मिनल पर हमले के दौरान एक भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकर ने सुरक्षित रूप से लगभग अस्सी हजार आठ सौ मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत के लिए प्रस्थान किया और उसके सभी भारतीय चालक दल सुरक्षित बताए गए हैं। उधर, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर विमान यात्रा पर भी दिख रहा है। कई विमान कंपनियों ने ईंधन अधिभार बढ़ा दिया है जिससे हवाई किराए में तेजी आई है और यात्री भविष्य की यात्राओं के लिए पहले ही टिकट बुक करने लगे हैं।
मोदी सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और देश में गैस की नियमित आपूर्ति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो एलपीजी संकट और गहरा सकता है।