By Ankit Jaiswal | Jan 01, 2026
सरकार ने एक बार फिर संकट में फंसी वोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को हुई बैठक में कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी AGR बकाये को पांच साल के लिए फ्रीज करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत करीब 87,695 करोड़ रुपये की देनदारी पर फिलहाल भुगतान का दबाव नहीं रहेगा।
हालांकि, राहत पूरी तरह से बिना शर्त नहीं है। सरकार की ओर से जारी नोट में साफ किया गया है कि वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से जुड़े AGR बकाये, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट पहले ही तय कर चुका है, उनका भुगतान वोडाफोन आइडिया को वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच करना ही होगा।
बता दें कि यह फैसला वोडाफोन आइडिया की हालिया अपील के बाद लिया गया है, जिसमें कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत राहत देने की मांग की थी। सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करते हुए बाकी बकाये को 2031-32 से 2040-41 के बीच पुनर्निर्धारित करने का निर्णय लिया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक फ्रीज किए गए AGR बकाये की दोबारा समीक्षा दूरसंचार विभाग द्वारा की जाएगी। यह प्रक्रिया 3 फरवरी 2020 की डिडक्शन वेरिफिकेशन गाइडलाइंस और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर होगी। इसके बाद एक सरकारी समिति अंतिम फैसला लेगी, जो दोनों पक्षों पर बाध्यकारी होगा।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार पहले ही वोडाफोन आइडिया में करीब 49 फीसदी हिस्सेदारी रखती है। ऐसे में सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल अपने निवेश की सुरक्षा करेगा, बल्कि टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और करोड़ों उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भी जरूरी है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि टेलीकॉम सेक्टर एक रणनीतिक क्षेत्र है और इसमें सीमित खिलाड़ियों का रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए वोडाफोन आइडिया को संचालन में बनाए रखना और उसके वित्तीय बोझ को संतुलित करना दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जरूरी है।