RSS मानहानि मामले में राहुल गांधी को बड़ी राहत, भिवंडी कोर्ट के आदेश को बॉम्बे HC ने किया रद्द

By अंकित सिंह | Jul 12, 2024

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राहत देते हुए, बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भिवंडी अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यकर्ता द्वारा पूर्व कांग्रेस प्रमुख के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में सबूत के रूप में कुछ अतिरिक्त दस्तावेजों की अनुमति दी गई थी। पूर्व कांग्रेस प्रमुख के खिलाफ मामले में आदेश न्यायमूर्ति पृथ्वीराज के चव्हाण ने पारित किया। गांधी ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि ट्रायल कोर्ट ने आरएसएस पदाधिकारी राजेश कुंटे को कुछ दस्तावेज "देर से" पेश करने की अनुमति दी थी।

इसे गांधी द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि मजिस्ट्रेट का आदेश उसी मानहानि की शिकायत से संबंधित कुंटे द्वारा दायर एक अन्य याचिका में उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के आदेश का उल्लंघन था। 2021 में, एकल-न्यायाधीश न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे ने आरएसएस पदाधिकारी द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता द्वारा दिए गए कथित अपमानजनक भाषण को स्वीकार करने या अस्वीकार करने की मांग की थी।

इसे भी पढ़ें: राहुल गांधी ने शेयर किया मणिपुर दौरे पर 5 मिनट लंबा वीडियो, PM Modi से की यह खास अपील

अपनी वर्तमान याचिका में, राहुल गांधी ने दावा किया कि उच्च न्यायालय के 2021 के आदेश के बावजूद, मजिस्ट्रेट उन्हीं दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेने के लिए आगे बढ़े, जो उन्हें दस्तावेजों को स्वीकार करने या अस्वीकार करने के लिए मजबूर करेगा। यह मामला 2014 में तब सामने आया जब कुंटे ने कांग्रेस नेता पर एक भाषण में अपमानजनक बयान देने का आरोप लगाया और आरोप लगाया कि हिंदू संगठन आरएसएस महात्मा गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार था। कुंटे ने 2014 में भिवंडी मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज की।

प्रमुख खबरें

Supreme Court जाएगी INDIA गठबंधन, CEC के खिलाफ याचिका दायर करने का फैसला

CEC Gyanesh Kumar पर सतर्कता जांच बदले की कार्रवाई नहीं, VD Satheesan ने किया स्पष्ट

Jio IPO को नुकसान पहुँचाने के लिए Elon Musk ने चला बड़ा दाँव, Mukesh Ambani का पलटवार Starlink को पड़ सकता है भारी

संतोष मूरत की साहब, मैं ज़िंदा हूँ वाली तख्ती से गृह मंत्रालय के ताले तक, जंतर-मंतर की अनकही कहानी