By अभिनय आकाश | Oct 03, 2024
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय के पिछले आदेश पर रोक लगाकर आध्यात्मिक नेता सद्गुरु जग्गी वासुदेव के नेतृत्व वाले ईशा फाउंडेशन को राहत दे दी है। हाई कोर्ट के फैसले में संगठन के खिलाफ आरोपों की पुलिस जांच अनिवार्य थी। अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को तय की गई है। ईशा फाउंडेशन ने तमिलनाडु पुलिस को अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जांच करने के लिए दिए गए मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 500 पुलिसकर्मियों ने उसके परिसरों पर छापेमारी की, चप्पे चप्पे की जांच की गई। सुप्रीम कोर्ट ने उन दो महिलाओं से विस्तृत जानकारी देने को कहा जिनके पिता ने ईशा फाउंडेशन में अपनी बेटियों को अवैध रूप से बंधक बनाए जाने का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था।
जांच एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एस कामराज द्वारा दायर एक याचिका से शुरू हुई, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी दो बेटियों, गीता (42) और लता कामराज (39) को उनकी इच्छा के विरुद्ध ईशा योग केंद्र में रखा जा रहा था। डॉ. कामराज ने संगठन पर व्यक्तियों को शिक्षा देने, उन्हें भिक्षु बनाने और उनके परिवारों के साथ उनके संचार को सीमित करने का आरोप लगाया। कोर्ट ने ईशा फाउंडेशन के संस्थापक जग्गी वासुदेव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से पूछताछ की कि उन्होंने युवा महिलाओं के लिए मठवासी जीवनशैली को क्यों बढ़ावा दिया, जबकि उन्होंने अपनी बेटी की शादी और स्थिर जीवन सुनिश्चित किया था।