Future Deal केस में Amazon की बड़ी जीत, Supreme Court ने खारिज किया CCI का 202 करोड़ का जुर्माना।

By Ankit Jaiswal | May 27, 2026

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में शामिल अमेजन को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी सीसीआई द्वारा लगाए गए 202 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द कर दिया है। बता दें कि यह जुर्माना अमेजन पर फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी खरीदते समय जरूरी जानकारी छिपाने के आरोप में लगाया गया था।

मौजूद जानकारी के अनुसार यह मामला साल 2019 में अमेजन द्वारा फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने से जुड़ा है। फ्यूचर कूपन्स, फ्यूचर रिटेल लिमिटेड से जुड़ी कंपनी थी। उस समय अमेजन ने सीसीआई को बताया था कि उसका उद्देश्य गिफ्ट कार्ड, लॉयल्टी कार्ड और भुगतान सेवाओं से जुड़े कारोबार को मजबूत करना है।

हालांकि बाद में जांच के दौरान सीसीआई को अमेजन के कुछ आंतरिक दस्तावेज मिले, जिनमें कथित तौर पर यह संकेत मिला कि कंपनी की वास्तविक रुचि फ्यूचर रिटेल के खुदरा कारोबार में रणनीतिक पकड़ बनाने की थी। रिपोर्ट के मुताबिक इन दस्तावेजों में “प्रोजेक्ट ताज” का भी जिक्र था, जिसमें फ्यूचर रिटेल के स्टोर नेटवर्क, तेजी से सामान पहुंचाने की योजना, निजी ब्रांड के किराना और फैशन उत्पादों समेत भविष्य में हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति शामिल थी।

सीसीआई का कहना था कि अमेजन ने सौदे की पूरी जानकारी सही तरीके से साझा नहीं की और फ्यूचर रिटेल से जुड़े समझौतों को छिपाया गया। आयोग ने यह भी माना था कि अमेजन ने फ्यूचर कूपन्स को केवल एक माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया ताकि उसे फ्यूचर रिटेल में विशेष अधिकार मिल सकें।

गौरतलब है कि नवंबर 2019 में सीसीआई ने इस सौदे को मंजूरी दी थी, लेकिन यह भी कहा था कि यदि बाद में दी गई जानकारी गलत पाई जाती है तो मंजूरी स्वतः रद्द मानी जाएगी। इसके बाद दिसंबर 2021 में सीसीआई ने अपनी मंजूरी को स्थगित करते हुए अमेजन को नया आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया था और 202 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

सीसीआई ने यह कार्रवाई प्रतिस्पर्धा कानून की विभिन्न धाराओं के तहत की थी। आयोग का आरोप था कि अमेजन ने गलत जानकारी दी, जरूरी तथ्यों को छिपाया और अधिग्रहण की सही प्रकृति को स्पष्ट नहीं किया।

इसके बाद अमेजन ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण यानी एनसीएलएटी में चुनौती दी थी। एनसीएलएटी ने सीसीआई के अधिकांश निष्कर्षों को सही माना और जुर्माने को बरकरार रखा था। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में अमेजन को राहत देते हुए जुर्माना रद्द कर दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान अमेजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम और अरविंद वर्मा ने पक्ष रखा। वहीं सीसीआई की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने दलीलें पेश कीं।

जानकारों का मानना है कि यह फैसला भारत में बड़े कारोबारी अधिग्रहण और प्रतिस्पर्धा कानून से जुड़े मामलों में एक अहम उदाहरण बन सकता है। साथ ही इससे विदेशी निवेश और नियामक पारदर्शिता को लेकर भी नई बहस शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

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