बिहार में Renewable Energy सेक्टर में 2.57 लाख करोड़ के Investment की उम्मीद

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 04, 2026

पटना, चार नवंबर बिहार में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 2.57 लाख करोड़ रुपये के निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है। बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने बुधवार को यह बात कही।

मंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 में बिहार में बिजली की मांग करीब 700 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 10 हजार मेगावाट हो गई है। हर घर बिजली योजना के तहत राज्य के प्रत्येक घर तक बिजली पहुंचाई गई है। राज्य सरकार पीएम-कुसुम और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है।

ऊर्जा विभाग के सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (बीएसपीएचसीएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने कहा कि अगले एक दशक में राज्य की बिजली मांग बढ़कर करीब 25 हजार मेगावाट होने का अनुमान है। उन्होंने 301 मेगावाट क्षमता की कजरा सौर ऊर्जा परियोजना और 523 मेगावाट आवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली का उल्लेख किया। यादव ने बताया कि राज्य में करीब 78,400 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं, जबकि बिजली उत्पादन, संचरण, वितरण और आधारभूत संरचना समेत विभिन्न क्षेत्रों के लिए कुल 2,57,316 करोड़ रुपये के निवेश की कार्ययोजना तैयार की गई है।

उन्होंने कहा कि बिहार अक्षय ऊर्जा नीति-2025 के तहत 2030 तक 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता और छह गीगावाट घंटा ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। सम्मेलन के दौरान अक्षय ऊर्जा, तकनीकी अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए तीन समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते बीएसपीजीसीएल और मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल के बीच समझौता शामिल है।

अन्य दो समझौते पावर सेक्टर स्किल काउंसिल तथा बिहार पावर ट्रेनिंग मैनेजमेंट सोसाइटी और बीएसपीजीसीएल तथा द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के बीच हुए। परिचर्चा में यादव ने कहा कि अगले दो से पांच वर्षों में वितरित अक्षय ऊर्जा, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और अक्षय ऊर्जा उपकरणों के विनिर्माण में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। राज्य का लक्ष्य विभिन्न योजनाओं के तहत करीब पांच हजार मेगावाट वितरित अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करना है।

परिचर्चा में अदाणी ग्रीन एनर्जी, टाटा पावर, एशियाई विकास बैंक और जर्मन बायोगैस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

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