By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 17, 2022
जदयू के समर्थन आधार में कोईरी और कुर्मी समाज शामिल हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अख्तियार किया है। मौर्य वंश की स्थापना सम्राट अशोक के दादा चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी। जायसवाल ने 13 जनवरी को पटना के कोतवाली थाने में उक्त मामले में एक प्राथमिकी दर्ज कराकर जदयू के प्रहार को कथित तौर पर कुंद करने की कोशिश की थी। साथ ही इस दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन और पार्टी संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का भी नाम लिए बिना सोमवार को कहा, ‘‘एक बिहार में एवं दूसरे केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। फिर इस तरह की बात कहना बेतुका है कि राष्ट्रपति जी द्वारा दिए गए पुरस्कार को प्रधानमंत्री वापस लें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दया प्रकाश सिन्हा के हम आप से सौ गुना ज्यादा बड़े विरोधी हैं क्योंकि आपके लिए यह मुद्दा बिहार में शैक्षिक सुधार जैसा मुद्दा है जबकि जनसंघ और भाजपा का जन्म ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर हुआ है।’’ जायसवाल ने धर्मनिरपेक्षता की पक्षधर रही जदयू के इन नेताओं से कहा, ‘‘हम अपनी संस्कृति और भारतीय राजाओं के स्वर्णिम इतिहास में कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकते। लेकिन हम यह भी चाहते हैं कि बख्तियार खिलजी से लेकर औरंगजेब तक के अत्याचारों की सही गाथा आने वाली पीढ़ियों को बताई जाए।’’ उन्होंने केंद्र में पूर्व में सत्तासीन रही कांग्रेस का नाम लिए बिना उसकी ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘74 वर्ष में एक घटना नहीं हुई जब किसी पद्मश्री पुरस्कार की वापसी हुई हो।’’
कुशवाहा ने अपने ट्विटर हैंडल पर जायसवाल को लिखे अपने पत्र को साझा करते हुए कहा, ‘‘आपने लिखा है कि आपकी पार्टी भारतीय राजाओं के स्वर्णिम इतिहास में कोई छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं कर सकती। मेरा सवाल है कि आप दया प्रकाश सिन्हा के द्वारा घोर व अमर्यादित में समाट अशोक की औरंगजेब से की गई तुलना को इतिहास में छेड़छाड़ मानते हैं या नहीं।’’ कुशवाहा ने जायसवाल से कहा, ‘‘आपने अपने वक्तव्य में कहा है कि राष्ट्रपति दवारा दिए गए पुरस्कार की वापसी की मांग प्रधानमंत्री से करना बेतुका है। मेरा आपसे दूसरा सवाल है कि मांग प्रधानमंत्री से की जाए या राष्ट्रपति से यह तो हम दोनों मिलकर तय कर लेंगे परन्तु पहले आप साफ-साफ यह तो बताइए कि पुरस्कार वापसी की हमारी मांग का आप समर्थन करते हैं या नहीं।’’ उन्होंने जायसवाल से कहा, ‘‘आपने अपने वक्तव्य में यह लिखा है कि बिहार की सरकार आपके आवेदन पर कार्रवाई करते हुए दया प्रकाश सिन्हा को सजायाफ्ता बनाये, फिर पदमश्री पुरस्कार वापस लेने की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति जी से मिले। आपका यह वक्तव्य भी पूर्णतः भटकाव पैदा करने वाला है क्योंकि अपने वक्तव्य में आपने स्वयं इस बात का उल्लेख किया है कि पहलवान सुशील कुमार पर हत्या के आरोप लगने के बावजूद राष्ट्रपति ने उनका पद्म पुरस्कार वापस नहीं लिया फिर भी आपका यह कहना कि दया प्रकाश सिन्हा को सजायाफ्ता हो जाने के बाद पुरस्कार वापसी की मांग की जाए, हास्यपद नहीं तो और क्या है।’’ कुशवाहा ने जायसवाल से कहा, ‘‘आपके वक्तव्य से स्पष्ट है कि पुरस्कार वापसी में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। सम्राट अशोक के प्रति अपमानजनक रूप से इतिहास को नए सिरे से परिभाषित करने के कुत्स्ति प्रयास का विरोध का इतिश्री बिहार पुलिस में एक आवेदन देकर कर लेना आपके लिए तो संभव है मगर हमारा विरोध तबतक जारी रहेगा जबतक दया प्रकाश सिन्हा का पुरस्कार वापिस नहीं हो जाता, चाहे राष्ट्रपति जी करें या प्रधानमंत्री जी।