जदयू की बैठक में भाजपा पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 10, 2022

पटना, 10 अगस्त।  जनता दल (यूनाइटेड) (जद-यू) के विधायकों और सांसदों ने मंगलवार को यहां एक बैठक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ पीठ में छुरा घोंपने के चौंकाने वाले आरोप लगाए। इस बैठक के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गठबंधन से नाता तोड़ लिया। जदयू सूत्र जो अपना नाम उजागर नहीं चाहते, के अनुसार कॉल विवरण सहित जानकारी साझा की गई थी, जिसमें सुझाव दिया गया था कि पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने भाजपा के इशारे पर पार्टी को विभाजित करने के इरादे से लगभग एक दर्जन विधायकों और एक मंत्री से संपर्क किया था।

हालांकि, 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के करीब आते ही भाजपा ने अपने रंग बदल लिए। वह स्पष्ट रूप से चिराग पासवान के विद्रोह के पीछे थी, जिन्होंने खुले तौर पर नीतीश कुमार को स्वीकार्य करने से इनकार कर दिया था। चिराग ने उन सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी जिनमें से कई भाजपा के तथाकथित बागी शामिल थे, को मैदान में उतारा था जहां जदयू ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) रह आरसीपी ने जदयू के कई उम्मीदवारों की हार सुनिश्चित करने की कोशिश की, जिन्हें वह पसंद नहीं करते थे।

पासवान के विरोध और आरसीपी सिंह की कथित भूमिका वास्तव में जदयू के लिए बहुत महंगी साबित हुई क्योंकि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था जो 71 से गिरकर 43 तक आ सिमटा था। कुमार के एक और कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री के रूप में लौटने के कुछ महीने बाद आरसीपी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह बनाई। हालांकि सिंह के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने को पार्टी के वास्तविक नेता कुमार की स्वीकृति नहीं थी और उन्हें एक और राज्यसभा कार्यकाल से वंचित कर दिया गया, जिसके कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

जदयू के नेताओं ने भाजपा से संबंधित मंत्रियों द्वारा ‘‘असहयोग’’ की भी शिकायत की थी। भाजपा की विधानसभा में संख्यात्मक ताकत जदयू की तुलना में अधिक थी। कहा जाता है कि भाजपा के कई नेताओं ने नीतीश के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए थे और भाजपा नेताओं के इस तरह के असंतोषजनक बयानों पर मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से भी नाराजगी जतायी थी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह राज्य मंत्रिमंडल में शामिल रहने के समय से ही कुमार के एक आलोचक के रूप में जाने जाते हैं। सिंह ने कुमार के इस कदम के तुरंत बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि नीतीश ने हमें धोखा देने के लिए मुहर्रम को चुना है। अपने सिद्धांतों और वादों की कुर्बानी के लिए इससे बेहतर अवसर और क्या हो सकता है।

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