Mamata Banerjee के भड़काऊ बयान के खिलाफ BJP पहुँची चुनाव आयोग, TMC प्रमुख को प्रचार से प्रतिबंधित करने की माँग

By नीरज कुमार दुबे | Mar 30, 2026

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है और इसी बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप भी अपने चरम पर पहुंच गए हैं। इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी ने आज एक गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से मांग की है कि राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी को चुनाव प्रचार से प्रतिबंधित किया जाए। पार्टी का कहना है कि उन्होंने चुनाव आचार संहिता का बार बार उल्लंघन किया है, जिससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

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ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग को अपने संवैधानिक अधिकारों का पूरा उपयोग करते हुए ऐसे उपाय लागू करने चाहिए जो प्रभावी और डर पैदा करने वाले हों, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके। भारतीय जनता पार्टी ने यह भी मांग की है कि राज्य में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए, जिससे मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

हम आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने आरोपों के समर्थन में कई घटनाओं का जिक्र किया है, जिनमें कथित तौर पर ऐसे बयान दिए गए जो राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देते हैं और आम लोगों के बीच भय का माहौल बनाते हैं। पार्टी का कहना है कि इस तरह की भाषा और रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे चुनावी वातावरण दूषित होता है।

विशेष रूप से उत्तर बंगाल के मयनागुड़ी क्षेत्र में ममता बनर्जी के एक बयान को लेकर विवाद और गहरा गया है। वहां एक सार्वजनिक मंच से उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को ऐसे पोस्टर लेकर बैठना पड़ेगा जिनमें लिखा होगा कि वह भाजपा से नहीं हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान को बेहद गंभीर और धमकी भरा बताया है।

पार्टी का कहना है कि इस तरह के बयान न केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को डराने का प्रयास हैं बल्कि यह लोकतंत्र की भावना के भी खिलाफ हैं। भारतीय जनता पार्टी ने अपने ज्ञापन में यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में व्यापक हिंसा हुई थी, जिसमें कई विपक्षी कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, उन्हें घायल किया गया और कई लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

इस पृष्ठभूमि में भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी के हालिया बयान उसी तरह के माहौल को फिर से पैदा करने की कोशिश का संकेत देते हैं। पार्टी का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और मतदाताओं के बीच डर का वातावरण बन सकता है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री होने के नाते ममता बनर्जी की जिम्मेदारी और भी अधिक है, लेकिन उनके आचरण से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों की अनदेखी की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग से यह भी अनुरोध किया है कि पूरे मामले की कड़ी निगरानी की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव की पवित्रता बनी रहे। पार्टी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव लोकतंत्र की नींव हैं और किसी भी प्रकार की अनियमितता को सख्ती से रोका जाना चाहिए।

अब सबकी नजर चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में ममता बनर्जी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई की जाती है। फिलहाल इतना जरूर है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा एक बड़ा चुनावी विवाद बन चुका है और आने वाले दिनों में इसका असर चुनावी माहौल पर साफ दिखाई दे सकता है।

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