टीएमसी का आरोप, पंचायत चुनावों के दौरान हिंसा में भाजपा के गुंडे शामिल थे

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 12, 2023

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान पर पलटवार करते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में जुलाई में पंचायत चुनावों के दौरान हुई हिंसा में राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘‘गुंडे’’ शामिल थे। टीएमसी सरकार के खिलाफ प्रधानमंत्री के आरोप को खारिज करते हुए पश्चिम बंगाल की मंत्री शशि पांजा ने केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर विभिन्न योजनाओं के तहत राज्य को उसके वित्तीय बकाये से वंचित करने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने भाजपा की पंचायती राज परिषद को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए पंचायत चुनाव के दौरान विपक्ष को डराने के लिए ‘‘आतंक का माहौल बनाने और धमकियां देने’’ को लेकर पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी की आलोचना की थी।

टीएमसी नेता ने यह भी दावा किया कि 2016 में नोटबंदी पूरी तरह विफल रही। ओ ब्रायन ने कहा, ‘‘काला धन अभी भी प्रचलन में है, आतंकवाद अभी खत्म नहीं हुआ है।’’ उन्होंने दावा किया कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार द्वारा कोविड प्रबंधन श्रमिक वर्ग के लिए एक ‘‘आपदा’’ की तरह था, जिसमें जल्दबाजी में लिए गए लॉकडाउन संबंधी निर्णयों का खामियाजा प्रवासी श्रमिकों को भुगतना पड़ा। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान वॉकआउट करने के लिए प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए टीएमसी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा, ‘‘मणिपुर पर आपके बोलने के लिए विपक्ष का संसद से वॉकआउट करना जरूरी था।’’ टीएमसी ने दावा किया कि विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद से बाहर जाने से पहले प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान 90 मिनट तक धैर्यपूर्वक इंतजार किया। पांजा ने कहा कि यह झूठ है कि बंगाल में आदिवासियों और दलितों पर अत्याचार हो रहा है।

मंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों में ही दलितों और आदिवासियों को प्रताड़ित किया जाता है।’’ पांजा ने कहा कि भाजपा अभी भी बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव और 2023 के पंचायत चुनाव की हार स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री यह कहकर टीएमसी की जीत को अलग रंग देने की कोशिश कर रहे हैं कि चुनाव के दौरान हिंसा हुई थी। पांजा ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट ने आयुष्मान भारत और कुछ अन्य केंद्रीय योजनाओं में खामियों की ओर इशारा किया है, प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर कुछ प्रकाश डालना चाहिए। टीएमसी ने ट्वीट किया कि नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल ने बहुआयामी गरीबी से निपटने में गुजरात को पीछे छोड़ दिया है और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जीवन स्तर के संकेतकों में भाजपा शासित राज्यों से बेहतर प्रदर्शन किया है।

मंत्री ने यह भी दावा किया कि केंद्र पर मनरेगा के मद में बंगाल का 7,500 करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को ‘‘गरीब परिवारों की परवाह’’ है, तो राज्य को तुरंत धनराशि जारी की जाए। टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा त्रिपुरा में 2019 के पंचायत चुनावों में हिंसा फैलाने की दोषी थी, जहां पार्टी ने बिना किसी मुकाबले के लगभग 80 प्रतिशत सीट पर जीत हासिल की। टीएमसी ने एक ट्वीट में दावा किया, ‘‘हिंसा और गुंडागर्दी भाजपा के खून में है।

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