भाजपा के पास हासिल करने को नहीं, खोने को है बहुत कुछ

By अजय कुमार | Jan 29, 2022

उत्तर प्रदेश विधान सभा के लिए प्रथम चरण का मतदान 10 फरवरी को होगा। प्रथम चरण में पश्चिमी यूपी के 11 जिलों में मतदान होना है। सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, अखिलेश यादव, जयंत चौधरी से लेकर तमाम छोटे-बड़े नेताओं ने पूरे पश्चिमी यूपी को एक तरह से मथ दिया है। राजनैतिक पंडित और बुद्धिजीवी भली भांति जानते हैं कि पश्चिम से जिस भी राजनैतिक दल की बयार बहेगी, उसका असर दूर तक जाएगा और उसी का बेड़ा पार हो जाएगा। यही कारण है कि सभी ने अपने-अपने तरकश के तीरों को और पैना कर पश्चिमी यूपी में छोड़ दिया है। पहले चरण में 11 जिलों शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, और आगरा की 58 सीटों पर मतदान होगा। पहले चरण में शामिल 58 सीटों पर कुल 810 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किये थे, इनमें से 658 नामांकन सही पाये गये। नामांकन पत्रों की जांच में सबसे ज्यादा 19 उम्मीदवार आगरा की बाह सीट पर हैं। इसके बाद 18 उम्मीदवार मुजफ्फरनगर सीट पर तो मथुरा सीट पर 15 उम्मीदवार मैदान में हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में भाजपा की प्रचंड लहर चली थी। बस पांच सीटें ऐसी रह गई थी जिन पर भाजपा के विजयी रथ को रोक लिया गया था। पहले चरण में जिन जिलो में मतदान होना है वहां जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के गठबंधन की भी परीक्षा होगी। जिन जिलों में मतदान होना है उसे रालोद का गढ़ माना जाता है। इन जिलों में रालोद को काफी उम्मीदें भी हैं। सपा के गठबंधन के बाद यदि जाट-मुस्लिम समीकरण कारगर हुआ तो गठबंधन का फायदा हो सकता है।

पलायन के बाद बात किसानों की कि जाए तो किसानों का रूख अभी अबूझ पहली बनी हुई है। जाट किसान किधर जाएगा, यह सब पता करना चाह रहे हैं। ज्ञातव्य हो कृषि कानूनों का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी उप्र में ही नजर आया था। पश्चिमी उप्र के किसान न केवल धरनों में शामिल हुए बल्कि सपा और रालोद गठजोड़ का जनक भी यही आंदोलन बना। अब इन जिलों में किसानों में भी अलग-अलग धड़े बन गए हैं। दोनों अपनी-अपनी बात कह रहे हैं। इस चरण में किसान मजबूती से किसके साथ खड़ा हुआ, उसका संदेश अन्य सीटों तक तेजी से जाएगा। इसे सभी दल गंभीरता से समझ रहे हैं और अपनी तैयारियों को इसी तरह से आकार दे रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: प्रयास तो बहुत हो रहे हैं, मगर आसान नहीं है युवा मतदाताओं को लुभाना

इस चुनाव में सभी को डैमेज कंट्रोल करने की बड़ी चुनौती है। भाजपा के पास यहां पाने को ज्यादा कुछ नहीं है, लेकिन खोने को बहुत कुछ है। 58 में से 53 सीटों पर बीजेपी के विधायक हैं। भाजपा के सामने किसान आंदोलन की नाराजगी को दूर करने की चुनौती है। हालांकि, भाजपा कानून-व्यवस्था के मुद्दे को बड़े स्तर पर सामने रख रही है। रालोद-सपा गठबंधन के सामने टिकटों के बंटवारे के बाद कई सीटों पर पैदा हुई रार को खत्म करने की चुनौती है। बसपा के सामने फिर से अपने अस्तित्व को खड़ा करने की चुनौती है। इस बार बसपा अकेले मैदान में जबकि सपा गठबंधन में हैं इसलिए बसपा को अतिरिक्त मेहनत करनी होगी।

- अजय कुमार

प्रमुख खबरें

आम आदमी को लगेगा बड़ा झटका! Petrol-Diesel Price में ₹28 तक की बढ़ोतरी के बने आसार

Liverpool फैंस को मिली बड़ी राहत, Mohamed Salah की Injury पर आया अपडेट, जल्द लौटेंगे मैदान पर

Thomas Cup में भारत का धमाल, Chinese Taipei को 3-0 से रौंदकर Semi-Final में बनाई जगह।

India-Bangladesh रिश्तों में तल्खी! असम CM के बयान पर Dhaka ने जताई कड़ी आपत्ति, भेजा समन।