By नीरज कुमार दुबे | Feb 07, 2024
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने शानदार कार्यों की बदौलत तो जाने ही जाते हैं साथ ही अक्सर उनके बयानों से ऐसा संकेत जाता है कि भाजपा आलाकमान के साथ उनके संबंध ठीक नहीं हैं। 2022 में भाजपा संसदीय बोर्ड से बाहर कर दिये जाने के बाद गडकरी के कुछ बयान ऐसे आये हैं जिससे यह प्रतीत हुआ कि 'सब कुछ ठीक नहीं है'। कई बार ऐसी अटकलें भी चली हैं कि अब गडकरी चुनाव नहीं लड़ना चाहते या सक्रिय राजनीति नहीं करना चाहते। हालांकि अपने बयानों के सुर्खियों में आने के बाद या विवाद उठने के बाद हमेशा गडकरी ने यही कहा है कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया।
हम आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री गडकरी लोकमत मीडिया समूह द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जिसमें सांसदों को उनके बेहतरीन योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता गडकरी ने कहा, ‘‘हमारी बहसों और चर्चाओं में मतभेद हमारी समस्या नहीं है। हमारी समस्या विचारों की कमी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे लोग भी हैं जो अपनी विचारधारा के आधार पर दृढ़ विश्वास के साथ खड़े हैं लेकिन इस तरह के लोगों की संख्या घट रही है। और विचारधारा में गिरावट, जो हो रही है, लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।’’ गडकरी ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘न तो दक्षिणपंथी और न ही वामपंथी, हम जाने-माने अवसरवादी हैं, कुछ लोग ऐसा लिखते हैं। और सभी सत्तारुढ़ दल से जुड़े रहना चाहते हैं।’’
हम आपको बता दें कि इस कार्यक्रम में कांग्रेस के लोकसभा सदस्य शशि थरूर और बीजू जनता दल के राज्यसभा सदस्य सस्मित पात्रा को वर्ष के सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बहुजन समाज पार्टी से निलंबित लोकसभा सदस्य दानिश अली और माकपा के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास को सर्वश्रेष्ठ नए सांसद का पुरस्कार मिला। इस समारोह में भाजपा सांसद मेनका गांधी और समाजवादी पार्टी सांसद राम गोपाल यादव को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर और भाजपा सांसद सरोज पांडे को साल की सर्वश्रेष्ठ महिला सांसद का पुरस्कार मिला।