By अंकित सिंह | Apr 10, 2026
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन आज दिल्ली में भाजपा मुख्यालय के विस्तार में एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं, जिसमें देश भर के राज्य अध्यक्षों और प्रभारियों को एक साथ लाकर महिला आरक्षण विधेयक पर एक राष्ट्रव्यापी रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए जागरूकता और समर्थन जुटाने हेतु विभिन्न राज्यों में जागरूकता अभियान चलाने के लिए एक सुनियोजित योजना तैयार करना है।
यह घटनाक्रम केंद्र सरकार द्वारा 16 अप्रैल से शुरू होने वाले तीन दिवसीय विशेष संसदीय सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पेश करने की योजना से पहले हुआ है। प्रस्तावित संशोधनों का लक्ष्य 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करके लंबित जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से महिला आरक्षण को अलग करना है, जिससे इसके कार्यान्वयन में तेजी लाई जा सके। यदि ये संशोधन स्वीकृत हो जाते हैं, तो लोकसभा की संख्या 543 से बढ़कर लगभग 816 हो जाएगी, जिसमें लगभग एक तिहाई, यानी लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
इसके साथ ही परिसीमन विधेयक भी अलग से पेश किए जाने की संभावना है, और दोनों को संवैधानिक संशोधनों के रूप में पारित होना आवश्यक है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण जारी रहेगा, लेकिन वर्तमान में इस ढांचे के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए कोई प्रावधान नहीं है। इस बीच, प्रस्तावित कदम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। शिवसेना नेता शायना एनसी ने इस पहल का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और कहा कि जहां राजनीतिक इच्छाशक्ति होती है, वहां पीएम मोदी होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से संसद में उनका प्रतिनिधित्व काफी बढ़ेगा।
भाजपा ने भी महिला संवाद जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से अपने जनसंपर्क प्रयासों को तेज कर दिया है, जिसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सीधे तौर पर शामिल करना, कानून के बारे में जागरूकता फैलाना और नागरिकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक को 'नारी शक्ति' को मजबूत करने और भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।