दिग्विजय सिंह के खिलाफ भाजपा के मंत्री विधायकों ने किए 10-10 करोड़ के मानहानि केस

By दिनेश शुक्ल | Oct 22, 2020

भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भोपाल की विशेष सत्र न्यायालय (एमपी एमएलए) में भाजपा के मंत्री-विधायकों ने 10-10 करोड़ रूपए की मानहानि के केस दर्ज कराए हैं। इसके साथ ही परिवादियों ने दिग्विजय सिंह को कठोरतम दंड एवं सजा दिए जाने की मांग भी विशेष कोर्ट से की है। विशेष सत्र न्यायालय ने सभी मामलों को गंभीर मानते हुए ग्राह्य कर लिया है। इस मामले में सुनवाई 18 नवंबर को होगी। दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले 17 मंत्री-विधायकों को लेकर पिछले दिनों सोशल मीडिया प्लेटफार्म व्हाट्सअप पर एक पोस्ट की थी। इस पोस्ट में उन्होंने भाजपा के मंत्री-विधायकों को बिकाउ बताते हुए उनकी कीमत 35-35 करोड़ रूपए बताई थी। इस पोस्ट के साथ दिग्विजय सिंह ने मंत्री-विधायकों के रेट कार्ड भी जारी किए थे। दिग्विजय सिंह ने पोस्ट में लिखा था कि लोकतंत्र के बही-खाते में जो लोग कांग्रेस से गद्दारी कर रूपए 35-35 करोड़ में बिके और उन्हें जिन लोगों ने वोट दिए उसमें से वोट देने वालों को उनका हिस्सा देना चाहिए। जब तक उन्हें उनका रूपए 35 करोड़ में से हिस्सा न मिले, तब तक वोट नहीं देना चाहिए। इस पोस्ट के बाद दिग्विजय सिंह को लेकर भाजपा ने सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर घेरा। अब भाजपा के मंत्री-विधायकों ने इसे अपनी मानहानि मानते हुए भोपाल के विशेष सत्र न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया है।

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दिग्विजय सिंह ने 17 मंत्री-विधायकों को लेकर फेसबुक पर पोस्ट की थी। इसके बाद से सभी इसे अपनी मानहानि मान रहे हैं, लेकिन अब तक करीब 10 मंत्री-विधायक भोपाल की विशेष सत्र न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि शेष विधायक भी जल्द ही विशेष सत्र न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करेंगे। अब तक विधायक रणवीर सिंह जाटव, विधायक नारायण पटेल, मंत्री हरदीप सिंह डंग, मंत्री गिर्राज दंडौतिया, पूर्व मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी और विधायक श्रीमती सुमित्रा कास्डेकर ने परिवाद प्रस्तुत नहीं किया है। ये भी जल्द ही परिवाद प्रस्तुत कर सकते हैं। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर कमलनाथ कैबिनेट में मंत्री बने सिंधिया समर्थक विधायक कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिर गई थी। भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आए विधायकों को मंत्री पद दिया था। इस घटनाक्रम के बाद से भाजपा-कांग्रेस में जमकर बयानबाजी भी चली। अब तक कांग्रेस इस मामले को चुनावी मुद्दा बनाकर भुनाने की तैयारी में थी, लेकिन भाजपा ने भी कांग्रेस को इसका करारा जबाव दिया है।

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