Nitin Nabin ने Rahul Gandhi को घेरा, बोले- देश की तरक्की से परेशान है कांग्रेस

By अंकित सिंह | Sep 16, 2026

UPI MDR ट्रांज़ैक्शन चार्ज पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ट्वीट पर BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पलटवार किया है। नितिन नवीन ने कहा कि विपक्ष की बेचैनी देश की तरक्की की वजह से है। उन्हें BRICS समिट, AI समिट में भी कमियां नज़र आती हैं। आज देश में चल रही विकास योजनाओं को देखिए; इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश 7 लाख करोड़ रुपये का है... वे आयुष्मान भारत या प्रधानमंत्री आवास योजना से फ़ायदा उठाने वाले लाखों-करोड़ों लोगों को नहीं देखते। उनमें इन मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने का नज़रिया नहीं है। इसलिए, सरकार की पहलों पर सिर्फ़ आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बजाय, इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि हम विकास के मॉडल के ज़रिए समाज को कैसे आगे बढ़ा रहे हैं।

इससे पहले कांग्रेस ने अमेरिकी संसद में भारत समेत अन्य देशों पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव से जुड़े विधेयक को लाए जाने और देश में यूपीआई लेनदेन पर शुल्क की व्यवस्था से संबंधित मुद्दों को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए भारतीय हितों से लगातार समझौता किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘नोटा’ का नया अर्थ ‘नरेंद्र’स ऑनगोइंग ट्रम्प अपीजमेंट’ (नरेन्द्र मोदी का लगातार ट्रंप को खुश करना) कर दिया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ऐसे समय में जब अमेरिका में भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने वाला विधेयक प्रतिनिधि सभा में विचार के लिए आने वाला है और भारतीय आव्रजकों तथा एच-1बी वीजा धारकों को लेकर अमेरिकी प्रशासन कड़े कदम उठा रहा है, केंद्र सरकार ने यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला किया है। उन्होंने सवाल किया कि यूपीआई पर 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) क्यों लगाया जा रहा है?

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रमेश ने पूछा कि क्या इसकी वजह यह है कि डेबिट कार्ड पर भी एमडीआर 0.4 प्रतिशत है और क्या इस कदम से अमेरिकी कार्ड कंपनियों को यूपीआई के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। कांग्रेस महासचिव ने सरकार के इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि शुल्क लगाने से यूपीआई व्यवस्था वित्तीय रूप से टिकाऊ बनेगी। उन्होंने कहा कि पूरे यूपीआई तंत्र को चलाने की अनुमानित वार्षिक लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये है और यह राशि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार को हस्तांतरित किए गए अधिशेष की तुलना में काफी कम है। रमेश ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से यूपीआई की शून्य-एमडीआर व्यवस्था को लेकर जताई गई आपत्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने इस साल की शुरुआत में यूपीआई के मुफ्त होने और उसके कारण वीजा तथा मास्टरकार्ड जैसी कंपनियों के कारोबार प्रभावित होने का मुद्दा उठाया था।

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