By अभिनय आकाश | Oct 15, 2022
भाजपा की अल्पसंख्यक शाखा रविवार को लखनऊ में समुदाय के “बुद्धिजीवियों” की एक बैठक आयोजित कर रही है। देश में किसी राजनीतिक दल द्वारा पसमांदा मुसलमानों के लिए इसे इस तरह का पहला कार्यक्रम बताया जा रहा है। ये बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हैदराबाद में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सभी समुदायों के "वंचित और दलित" वर्गों तक पहुंचने का आग्रह करने के तीन महीने बाद आई है। बीजेपी के इस कदम को पसमांदा (पिछड़े वर्ग) मुसलमानों के लिए एक आउटरीच के रूप में देखा जा रहा है। 'पसमांदा बुद्धिजीवी सम्मेलन' के नाम से होने वाले इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बैठक में मुख्य अतिथि होंगे। इसके अलावा यूपी सरकार में राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी भी शामिल होंगे। वह भाजपा राज्य सरकार में एकमात्र मुस्लिम मंत्री और पसमांदा हैं।
पसमांदा मुसलमानों को साधने के लिए भाजपा का रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मुसलमानों के बीच उनकी 85 प्रतिशत की भारी भागीदारी है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों के वोट बैंक से मेल खाते इस समुदाय को वे अपने साथ जोड़ने के प्रयास में रहते हैं। एक पसमांदा नेता के अनुसार, मुस्लिम समुदायों के हिस्से के रूप में कई जातियों की पहचान की गई है जो बाकी की तुलना में सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। इनमें अंसारी, मंसूरी, कासगर, रायन, गुजर, घोसी, कुरैशी, इदरीसी, नाइक, फकीर, सैफी, अल्वी और सलमानी शामिल हैं।