मोदी सरकार के साल: राज्यसभा में दिखा भाजपा का दम, कई बिल पास कराने में मिली मदद

By अंकित सिंह | Jun 02, 2020

31 मई को मोदी सरकार पार्ट-2 के 1 साल पूरे हो रहे है। 2019 में हुए आम चुनाव में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा ने इतिहास रचते हुए अपने दम पर तीन सौ से ज्यादा सीटें हासिल करने में कामयाबी पाई। संसदीय राजनीति के तौर पर पिछला 1 साल भाजपा के लिए स्वर्णिम रहा है। लोकसभा चुनाव में अपने राजनीतिक कार्यकाल में भाजपा ने अब तक के सबसे ज्यादा सीटें जीती। वहीं राज्यसभा में भी पार्टी बहुमत के आंकड़े को भी छू सकती है। हालांकि पिछले 1 सालों में हमने देखा कि किस तरीके से लोकसभा और राज्यसभा में पार्टी का दबदबा रहा। फिलहाल राज्यसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो है लेकिन अभी भी स्पष्ट बहुमत से दूर है। आपको बता दें कि संसद के उच्च सदन में सदस्यों की संख्या 250 होती है। लेकिन वर्तमान में राज्यसभा में 245 सांसद है जिनमें से 233 राज्य के विधान सभा द्वारा चुने जाते हैं जबकि 12 को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है। बहुमत के लिए 123 सांसद सदस्य जरूरी है।

वर्तमान परिस्थिति में देखे तो भारतीय जनता पार्टी 75 सीटों के साथ राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद कांग्रेस 39 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर है। टीएमसी 13 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर है। अगर हम बात भाजपा नीत एनडीए गठबंधन की करें तो एनडीए के पास फिलहाल 106 सीटें हैं। राज्यसभा की 20 सीटें फिलहाल खाली हैं जिनमें से 18 सीटों पर चुनाव होने थे लेकिन कोरोना संकट के कारण इन सीटों पर चुनाव टल गए हैं। इस साल राज्यसभा की 73 सीटें खाली हो रही थी जिन पर चुनाव होने थे। 55 सीटों पर मार्च में चुनाव हुए थे जिनमें से 37 सीटों पर प्रत्याशियों ने निर्विरोध चुनाव जीत लिया। बची हुई 18 सीटों पर चुनाव होने थे परंतु कोरोना संकट के कारण उसे टालना पड़ा।

भले ही भाजपा विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई जिसका असर राज्यसभा चुनाव में जरूर पड़ेगा और सीटों में भी फर्क दिखेगा। परंतु पिछले कुछ ऐसे फैसलों ने भाजपा की फ्लोर मैनेजमेंट को सिद्ध कर दिया। भले ही राज्यसभा में भाजपा बहुमत से दूर है लेकिन तीन तलाक नागरिकता संशोधन कानून और अनुच्छेद 370 खत्म करने को लेकर पार्टी ने राज्य सभा में शानदार फ्लोर मैनेजमेंट किया। इस मैनेजमेंट का असर यह रहा कि तीनों विवादित बिल आसानी से पास हो गए। भाजपा एनडीए के बाहर के कुछ दलों को भी अपने पक्ष में करने में कामयाब रही। नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति और वाईएसआर कांग्रेस जैसे कुछ पार्टियां भाजपा के साथ इन फैसलों में खड़ी रही। 2019 के आखिरी क्षणों में भाजपा को एक बड़ा झटका लगा। शिवसेना के अलग हो जाने के कारण राज्यसभा में गठबंधन की सीटों में कमी आई। भाजपा को पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव में जिन राज्यों में नुकसान का सामना करना पड़ा उनमे महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य शामिल है। उत्तर प्रदेश में भाजपा को फायदा हुआ है।

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भले ही मोदी सरकार ने पिछले 1 साल में धारा 370, तीन तलाक जैसे विवादित मुद्दों पर पार्टी के संकल्पों को साकार किया हो परंतु आगे भी इसे कई मुश्किल और विवादित बिलों का सामना करना है। इसी कारण पार्टी हर हाल में राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा छूने की कोशिश कर रही है। किसी भी बिल को पास कराने के लिए राज्यसभा के रास्ते गुजरना ही पड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की चुनावी रणनीति के लिए सबसे बड़ी चुनौती राज्यसभा में भाजपा को बहुमत का आंकड़ा दिलाना है। अगर पार्टी राज्यसभा में बहुमत की स्थिति में रही तो समान नागरिक संहिता जो कि भाजपा के प्रमुख संकल्पों में से एक है, वह भी नहीं बचेगा। जिन पार्टियों ने फिलहाल तीन तलाक और नागरिकता संशोधन कानून में भाजपा का समर्थन किया था वह पार्टिया एनआरसी कानून से दूरी बना सकती हैं। एनआरसी नरेंद्र मोदी और अमित शाह के प्रमुख एजेंटों में से एक है। देश में एनआरसी लागू कराना है तो उसे राज्यसभा के रास्ते गुजर ना ही पड़ेगा तभी वह मंजिल तक पहुंच पाएगा।

- अंकित सिंह

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