भाजपा ने शुरू की तीसरी बार मोदी को यूपी के ‘रास्ते’ दिल्ली भेजने की तैयारी

By अजय कुमार | Jun 02, 2022

उत्तर प्रदेश के वोटरों की प्रधानमंत्री चुनने के आदत पुरानी है। आजादी के बाद से एक-दो अपवादों को छोड़कर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर वही नेता बैठा जिसे यूपी की जनता ने अपना आशीर्वाद दिया। चाहे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू हों या फिर उनके बाद लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, वीपी सिंह या चन्द्रशेखर, यह सब यूपी से ही लोकसभा चुनाव जीत कर प्रधानमंत्री बने थे। इसी प्रकार से पिछली दो बार से यूपी के वोटर अपने दम पर नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा चुके हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजे इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि यदि यूपी के वोटर बढ़-चढ़कर बीजेपी के लिए मतदान नहीं करते तो मोदी के लिए पीएम की कुर्सी पर बैठना असंभव था।

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2014 लोकसभा चुनाव की बात करें तो तब यूपी में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत के साथ 71 सीटें मिलीं थीं, पार्टी के खाते में 42.3 फीसदी वोट गए थे और नरेन्द्र मोदी पीएम बने थे। साल 2014 में नरेंद्र मोदी वाराणसी और गुजरात की एक सीट से लोकसभा चुनाव जीते थे। बाद में मोदी ने गुजरात की सीट से इस्तीफा दे दिया था। वाराणसी में मोदी जब 2014 में पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरे थे तो उनको चुनौती देने के लिए आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल भी मैदान में कूद पड़े थे। उस समय मोदी को 581022 वोट मिले थे जबकि उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे ‘आप’ के अरविंद केजरीवाल को 209238 वोट मिले थे। इसी प्रकार 2019 के लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी गठबंधन के खाते में 64 सीटें आईं थीं, जिसमें 62 सीटें बीजेपी की और अपना दल की दो सीटें शामिल थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी मोदी ने वाराणसी से शाानदार जीत हासिल की थी। अब 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भी दिल्ली की सत्ता की राह यूपी से बनाई जा रही है। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता तो संकल्पित नजर आ ही रहे हैं, योगी सरकार भी अपनी तरफ से कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। यही वजह है योगी सरकार-2 अपनी ही नहीं मोदी सरकार की स्वप्निल योजनाओं को आगे बढ़ाने का काम युद्ध स्तर पर जारी रखे हुए है। 2022 के विधान सभा चुनाव जीतने के बाद अब योगी का एक मात्र लक्ष्य 2024 में तीसरी बार मोदी को पीएम बनाने का है। इसके लिए योगी ने अपने दिल का ही नहीं, अपनी सरकार का ‘खजाना’ भी खोल दिया है। 


दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होने के बाद योगी सरकार ने जो बजट पेश किया है उसमें दिल्ली की सत्ता के लिए ‘मिशन-2024’ की आहट साफ सुनाई दे रही है। बजट में ऐसे तमाम साक्ष्य नजर आ रहे हैं जिससे पता चलता है कि 2024 के चुनाव के मद्देनजर हर उस वर्ग को भाजपा के साथ और मजबूती से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जो मोदी के विजय रथ को तेजी के साथ आगे बढ़ाने में मददगार साबित होंगे। साथ ही भाजपा की ‘जो कहती है वह करती है’ वाली छवि पर कोई आंच न आए, इसके लिए बजट में अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, चित्रकूट, श्रंगबेरपुर, विंध्याचल जैसे हिंदुत्व से जुड़े तमाम स्थलों के विकास पर जोर दिया गया है। पुरोहित कल्याण बोर्ड के गठन के जरिये उम्रदराज पुजारियों व संतों की सहायता के संकल्प और 2025 में प्रयागराज में प्रस्तावित महाकुंभ की व्यवस्थाओं के लिए अभी से बजट में उल्लेख करना भी इसी कोशिश का ही हिस्सा है। साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय का भी पूरा ध्यान रखा गया है। योगी सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण के लिए बजट में सबसे अधिक फोकस युवाओं की पढ़ाई-लिखाई पर दिया है, लेकिन इतने बड़े बजट की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकार धन की व्यवस्था किस तरह करेगी ये भी एक चुनौती बन सकती है।

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उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग समाज के वोटरों की अच्छी खासी तादाद है। किसी भी चुनाव में यह वोटर निर्णायक साबित होते हैं। इसीलिए योगी सरकार हिन्दुत्व का बड़ा चेहरा एवं पिछड़ों के नेता समझे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के नाम पर गांव में स्ट्रीट लाइट योजना शुरू करने जा रही है। गौरतलब है कि स्वर्गीय कल्याण सिंह न सिर्फ अयोध्या आंदोलन के नायक थे बल्कि 1991 में भाजपा की पहली सरकार के मुख्यमंत्री थे। बड़े नेता होने के अलावा वह ऐसे शख्स थे जो हिंदुत्व की सोशल इंजीनियरिंग पर बिल्कुल फिट बैठते थे। जिनका चेहरा हिंदुत्व का था, लेकिन पिछड़ी जातियों के लिए वह अपने नेता थे। उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के कद का नेता मुलायम सिंह को ही माना जाता था और कोई अन्य नेता इन दोनों के इर्दगिर्द नजर नहीं आता था।


बताते चलें कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए बतौर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी यदि किसी नेता का हाथ पकड़कर प्रदेश में घूमे थे तो वह कल्याण सिंह ही थे। बजट में उनके नाम पर गांव में स्ट्रीट लाइट की योजना शुरू करने का प्रावधान देखने में भले ही एक सामान्य बात लगे। पर, इसके जरिये भाजपा ने कल्याण को सम्मान के सहारे सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत बनाने की कोशिश की है उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। इसी तरह निषादराज बोट सब्सिडी योजना के जरिये भी सामाजिक समीकरण ही साधने की कोशिश की गई है। प्रभु राम के सखा निषाद राज केवट के सहारे पीएम मोदी अक्सर निषाद समाज को अपना बनाने में लगे रहते हैं।


योगी सरकार समाज के हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ योजनाएं लाकर अपनी पीठ थपथपाने में लगी है। इसी कड़ी में बजट में हर परिवार के एक सदस्य को रोजगार या नौकरी, निराश्रित महिलाओं, बुजुर्गों एवं दिव्यांगों की पेंशन में बढ़ोतरी के लिए धन का प्रावधान, चुनाव में किए गए वायदे के अनुसार उज्ज्वला रसोई गैस लाभार्थियों को वर्ष में दो बार मुफ्त सिलेंडर देने के लिए धन की व्यवस्था, बुंदेलखंड को अगले पांच सालों में पूरी तरह प्राकृतिक कृषि से जोड़ने का संकल्प, किसानों के लिए भामाशाह कोष स्थापित करना 2024 के मिशन को मजबूत करने का ही हिस्सा है। यह बात अब किसी से छिपी नहीं है कि भाजपा के विजय अभियान को लगातार आगे बढ़ाने में सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं की काफी भूमिका रही है। शायद इसीलिए योगी सरकार ने लाभ से वंचित गरीबों को भी सूची में शामिल कर उन्हें भी इनका लाभ दिलाने की व्यवस्था की है ताकि गरीबों का जुड़ाव भी ज्यादा मजबूत रहे।


योगी सरकार ने कई लोकलुभावन घोषणाएं तो कर दी हैं लेकिन इन सब योजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा और संसाधन जुटाना आसान नहीं होगा। सब सरकार के बेहतर राजस्व वसूली के अनुमानों पर टिका हुआ है। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि देश व दुनिया की जो मौजूदा आर्थिक स्थिति है उसको देखते हुए यह आशंका निर्मूल नहीं है कि राजस्व प्राप्ति के अनुमान फिसल न जाएं। विश्व के अन्य देशों में यूक्रेन संकट के चलते मंहगाई सिर उठाए हुए है। विकास की गति भी सुस्त है। इसके असर से भारत भी अछूता नहीं रह गया है। कुल मिलाकर 2024 में तीसरी बार फिर मोदी को यूपी के ‘रास्ते’ दिल्ली भेजने की तैयारी तेज हो गई है। यह तैयारी उन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में चल रही है जो इसी वर्ष मार्च में हुए विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करके दोबारा मुख्यमंत्री बने हैं, खास बात यह है कि योगी से पहले यूपी में कोई भी नेता लगातार दो बार मुख्यमंत्री नहीं बन पाया था।


-अजय कुमार

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