महामारी के प्रकोप के बीच ही उत्तर प्रदेश में भाजपा ने शुरू की पंचायत चुनावों की तैयारी

By अजय कुमार | May 22, 2020

कोरोना महामारी के चलते थोड़े समय के लिए दुनिया भले ही ठहर गई थी, लेकिन यह अस्थाई दौर था जो खत्म हुआ तो केन्द्र और राज्यों की सरकारें लॉकडाउन के चलते हुए ‘नुकसान’ की भरपाई के लिए फिर से हाथ-पैर मारने लगी हैं। केन्द्र और तमाम राज्यों की सरकारें इस कोशिश में लगी हैं कि कैसे देश-प्रदेश को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जाए। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी इसी प्रयास में लगी है कि कैसे लॉकडाउन के चलते बंद हो गए उद्योग धंधों को पुनः चालू किया जा सके। इसके साथ ही कोरोना के चलते जिनका रोजगार छिन गया था, उनके लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं। मनरेगा के माध्यम से मजदूरों को काम दिया जा रहा है तो छोटा-मोटा धंधा करने वालों को बिना किसी गारंटी के कर्ज दिया जा रहा है ताकि यह लोग अपना काम-धंधा पुनः जीवित कर सकें। योगी सरकार द्वारा तमाम ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जिससे किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, ठेला लगाने वालों आदि सबका उद्धार हो सके।

एक तरफ योगी सरकार प्रदेश को पटरी पर लाने में लगी है तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में लगी है। इसी लिए लॉकडाउन-4 में ढिलाई मिलने के दूसरे ही दिन से भारतीय जनता पार्टी ने विधान परिषद और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया। प्रदेश भाजपा आलाकमान ने मंडल एवं जिला स्तर के अपने पदाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग व ब्रिजकॉल जैसे संचार सुविधाओं के जरिए पंचायत चुनाव के लिये टोलियां तैयार करने को कहा है।

इसे भी पढ़ें: कोरोना के बढ़ते आंकड़े चिंताजनक जरूर हैं, मगर अब इसके साथ ही जीना होगा

उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अक्टूबर में प्रस्तावित हैं। पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओं से निरंतर सेवा कार्यों में जुटे रहने को कहा गया है तो दूसरी तरफ इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि पंचायत चुनाव के समय परिवारवाद से बचा रहा जाए। इसीलिए पंचायत चुनाव की जिम्मेदारी संभालने वालों को खुद और अपने परिवार के लिए टिकट मांगने की मनाही कर दी गई है।

   

पंचायत चुनाव प्रभारी महामंत्री विजय बहादुर पाठक का कहना है कि वैसे तो अभी पार्टी कोरोना संक्रमण से बने विकट हालात से निपटने में जुटी है। साथ ही राजनीतिक गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। इस बार गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का उद्देश्य लेकर भाजपा पूरी ताकत से पंचायत चुनाव में उतरेगी। कल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के पक्ष में अनुकूल माहौल है। बूथ व सेक्टर स्तर पर संगठनात्मक सक्रियता का लाभ भी मिलेगा।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण आरंभ होने से पहले ही पंचायतीराज मंत्री भूपेंद्र सिंह, श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, कमल रानी व रमाशंकर पटेल को कोर कमेटी में शामिल करके क्षेत्रवार दायित्व भी दिए गए थे। इसी क्रम में मंडल व जिलों से ऐसे प्रमुख कार्यकर्ताओं के नाम मांगे गए थे, जोकि पंचायत चुनावों के जानकार हों। जिलाध्यक्षों के साथ तीन वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी आयोजित हो चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत चुनाव पर विशेष फोकस करेगी।

इसे भी पढ़ें: क्या है एक देश-एक राशन कार्ड योजना और इससे किसको कैसे मिलेगा फायदा?

खैर, बात आगामी अक्तूबर में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव की कि जाए तो अबकी पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण का गणित काफी बदला-बदला नजर आएगा। इस बार आरक्षण का फिर से निर्धारण किया जाएगा। इस नए निर्धारण से प्रदेश में पंचायतों के आरक्षण की स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी। वर्ष 2015 में हुए पिछले पंचायत चुनाव में जो पंचायत जिस वर्ग के लिए आरक्षित हुई थी, इस बार वह उस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होगी। चक्रानुक्रम से पंचायत का आरक्षण परिवर्तित हो जाएगा। मान लीजिए कि अगर इस वक्त किसी ग्राम पंचायत का प्रधान अनुसूचित जाति वर्ग से है तो अब इस बार के चुनाव में उस ग्राम पंचायत का प्रधान पद ओबीसी के लिए आरक्षित हो सकता है। चुनावों के लिए नए चक्रानुक्रम के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति महिला, अनारक्षित, महिला, अन्य पिछड़ा वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जनजाति महिला के वर्गों में नए सिरे से आरक्षण तय किया जाएगा। प्रदेश का पंचायती राज विभाग आरक्षण में बदलाव की यह कवायद जुलाई-अगस्त में पूरी करेगा क्योंकि नए आरक्षण का निर्धारण चुनाव से तीन महीने पहले किया जाता है।

अनुमान है कि पिछले 5 वर्षों में करीब 250 से 300 ग्राम पंचायतें शहरी क्षेत्र में पूरी तरह या आंशिक रूप से शामिल की गई हैं। इस हिसाब से इतनी पंचायतें कम हो जाएंगी। इनका ब्योरा राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर विकास विभाग से मांगा है। राज्य निर्वाचन आयोग भी नगर विकास विभाग की इस कवायद के पूरे होने का इंतजार कर रहा है। उसके बाद ही आयोग आगामी चुनाव के लिए ग्राम पंचायतों की वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का अभियान शुरू करेगा जिसमें बूथ लेबल आफिसर घर-घर जाकर पंचायतों के वोटरों की जानकारी संकलित करेंगे।

इसे भी पढ़ें: आत्मनिर्भर नहीं, कर्ज निर्भर भारत बनाने वाला है यह आर्थिक पैकेज

इस बार पंचायत चुनाव को पूरी गंभीरता से लड़ने को तैयार बीजेपी ने पंचायत चुनाव अभियान में पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों व सांसदों को भी जोड़ने का मन बना लिया है। पार्टी पंचायत चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास मानकर मैदान में उतरेगी। उधर, शिक्षक व स्नातक क्षेत्र की 11 सीटों पर होने वाले विधान परिषद चुनाव में घोषित प्रत्याशियों द्वारा मतदाताओं व कार्यकर्ताओं से ऑनलाइन संपर्क व संवाद जारी है।

-अजय कुमार

प्रमुख खबरें

SEBI Order के खिलाफ SAT पहुंचे Zee Entertainment और Punit Goenka, बुधवार को होगी अहम सुनवाई

Lionel Messi को चैंपियन बनाने वाले पिता Jorge Messi का निधन, दिग्गज Rafael Nadal ने जताया गहरा शोक

Aston Villa छोड़ PSG लौटे Lucas Digne, 11 साल बाद फिर पहनेंगे पेरिस की जर्सी, 2029 तक हुआ Deal साइन

5 साल के फतेह ने Thailand में रचा इतिहास, Gatka on Skates में जीता World Martial Arts Games Gold Medal