Bengal Vote Counting पर Supreme Court का निर्देश, TMC-BJP दोनों ने ठोका अपनी-अपनी जीत का दावा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 02, 2026

पश्चिम बंगाल में मतगणना के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तैनाती को लेकर निर्वाचन आयोग के परिपत्र पर उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने शनिवार को स्वागत किया और दोनों ने इसे अपने पक्ष में बताया। उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतगणना के लिए केंद्र सरकार के कर्मियों की तैनाती संबंधी निर्वाचन आयोग के परिपत्र को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर आगे किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस याचिका पर सुनवाई से इनकार एक स्पष्ट संदेश है कि मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करने या उस पर संदेह पैदा करने के प्रयासों को किसी भी सूरत में वैधता नहीं मिलेगी। एक और दिन ममता बनर्जी के लिए एक और न्यायिक हार।’’ हालांकि, तृणमूल ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों ने उसके रुख को सही साबित किया है।

पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के समक्ष उठाया गया मुद्दा उक्त परिपत्र के उस क्रियान्वयन से संबंधित था, जिसके तहत मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायक के पदों पर केवल केंद्र सरकार अथवा केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को ही नियुक्त किया जा रहा था।’’ तृणमूल ने कहा कि यह बात उठाई गई कि परिपत्र की ऐसी व्याख्या और क्रियान्वयन निष्पक्ष एवं संतुलित मतगणना प्रक्रिया के मूल ढांचे के विरुद्ध है।

बयान में कहा गया, ‘‘पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने निर्देश दिया कि 13 अप्रैल 2026 के परिपत्र का मतगणना पर्यवेक्षकों और सहायकों की नियुक्ति से संबंधित खंड-एक को उसी परिपत्र के दूसरे पृष्ठ में दर्ज उस प्रमुख प्रावधान के साथ मिलाकर पढ़ा जाए, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों के कर्मचारियों के यादृच्छिक चयन की बात कही गई है।’’

इसमें यह भी कहा गया, ‘‘न्यायालय ने भारत निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू के इस आश्वासन को भी रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है कि परिपत्र का अक्षरशः पालन किया जाएगा।’’ तृणमूल ने कहा कि इन निर्देशों के बाद उम्मीद है कि मतगणना निष्पक्ष, पारदर्शी और संतुलित तरीके से संपन्न होगी।

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग (ईसी) मतगणना कर्मियों का चयन कर सकता है और उसके 13 अप्रैल के परिपत्र को गलत नहीं कहा जा सकता है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि परिपत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मी संयुक्त रूप से काम करेंगे और तृणमूल कांग्रेस की किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका निराधार है।

निर्वाचन आयोग ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि परिपत्र का अक्षरशः पालन किया जाएगा। तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शुरुआत में कहा था कि परिपत्र 13 अप्रैल का था, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी 29 अप्रैल को मिली। पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि निर्वाचन आयोग मतगणना कर्मियों का चयन केवल एक ही समूह यानी केंद्र सरकार से कर सकता है और इसलिए उसके परिपत्र को गलत नहीं कहा जा सकता।

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