By अंकित सिंह | Dec 16, 2020
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत मिलने के बाद सब को इस बात की उम्मीद थी कि नीतीश कुमार के साथ उपमुख्यमंत्री का दायित्व सुशील मोदी ही निभाएंगे। लेकिन भाजपा ने दो नए चेहरे को सामने लाकर बिहार की राजनीति से सुशील मोदी को केंद्र की राजनीति में बुला लिया। इसके साथ ही भाजपा ने इस बात का भी संकेत दे दिया कि अब वह बिहार में नए चेहरों को मौका देने जा रही है। नए चेहरों में उन लोगों को ज्यादा महत्व दी जाएगी जो की युवा पीढ़ी के हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अब बिहार में कैबिनेट का विस्तार मकर संक्रांति के बाद ही होगा। 1 महीने का खरमास होता है जिसे अशुभ माना जाता है। कैबिनेट विस्तार को लेकर कई नेता इस उम्मीद में थे कि उन्हें आने वाले दिनों में मौके दिए जाएंगे और मंत्री बनाए जाएंगे। लेकिन फिलहाल ऐसे नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
पार्टी सूत्रों की माने तो नीतीश मिश्रा, नितिन नवीन, संजीव चौरसिया और सम्राट चौधरी मंत्री बनने की रेस में सबसे आगे हैं। माना जा रहा है कि अगले कैबिनेट विस्तार में इन्हें मंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि बिहार में कैबिनेट विस्तार का पेच फंसा हुआ है। कैबिनेट विस्तार को लेकर जदयू लगातार 50-50 की बात कर रही है जबकि भाजपा ज्यादा सीटें मांग रही है। इसके अलावा इस बात का भी इंतजार किया जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के कुछ विधायक टूट सकते हैं। ऐसे में उनमें से कुछ को मंत्री पद दिया जा सकता है। हालांकि जो भी हो, लेकिन यह बात भी तय है कि अब बिहार में भाजपा सुशील मोदी युग से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है। नए और युवा नेताओं को आगे कर लोगों को साधने की कोशिश कर रही है ताकि आने वाले दिनों में वो खुद को मजबूत कर अपने दम पर चुनाव लड़ सके।