बिहार में बड़े भाई की भूमिका में चुनाव लड़ेगी भाजपा- एनडीए गठबंधन का फॉर्मूला तय हो गया

By संतोष पाठक | Mar 06, 2025

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दिलचस्प दौर जारी है। नीतीश कुमार जहां एक बार फिर अपने पुराने रूप में आते हुए लालू यादव और राबड़ी देवी पर तीखा हमला बोल रहे हैं। नीतीश तेजस्वी यादव पर निशाना साधने के साथ ही बिहार के मतदाताओं को 2005 से पहले के बिहार की भी लगातर याद दिला रहे हैं।

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भाजपा के रणनीतिकारों को भी नीतीश कुमार की राजनीतिक शैली का बखूबी अंदाजा है। इसलिए पार्टी के रणनीतिकारों ने पहले ही इसे ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बना ली है। बताया जा रहा है कि भाजपा इस बार बिहार के विधानसभा चुनाव में बड़े भाई की भूमिका में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। वर्ष 2020 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन में जेडीयू और भाजपा के बीच 122-121 के फॉर्मूले पर सीटों का बंटवारा हुआ था। जेडीयू को मिले 122 सीटों में से 115 पर नीतीश कुमार ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे और 7 सीटें जीतन राम मांझी की पार्टी को दिया था। वहीं भाजपा ने अपने कोटे की 121 सीटों में से 110 पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे और 11 सीटें मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी को दे दी थी। पिछले विधानसभा चुनाव में 110 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा को 74 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। जबकि भाजपा से ज्यादा यानी 115 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद नीतीश कुमार की पार्टी सिर्फ 43 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी। 

इस बार भाजपा ने बिहार में जेडीयू से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार कर ली है। इस रणनीति के तहत भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव के 122-121 के फॉर्मूले को दरकिनार करते हुए 139-104 का नया फॉर्मूला तैयार कर लिया है। इस फॉर्मूले के हिसाब से 2020 के विधानसभा चुनाव में 115 सीटों पर लड़ने वाले नीतीश कुमार की पार्टी को इस बार सिर्फ 104 सीटों पर ही संतुष्ट होना पड़ेगा। भाजपा इस फॉर्मूले के तहत 139 सीटें अपने कोटे में रखने की तैयारी कर रही है। भाजपा के आला नेताओं ने नीतीश कुमार को इस फॉर्मूले के बारे में बताते हुए यह भी साफ कर दिया है कि पार्टी अपने कोटे में से ही गठबंधन में शामिल अन्य दलों को सीटें देंगी।  

बताया जा रहा है कि 139 सीटों के अपने कोटे में से भाजपा 20 सीट चिराग पासवान की पार्टी को देगी और 7-7 सीट जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को देगी। बाकी बची 105 सीटों पर भाजपा अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। इस हिसाब से भाजपा नीतीश कुमार की पार्टी से एक सीट ज्यादा पर चुनाव लड़कर बिहार एनडीए गठबंधन की राजनीति में न केवल बड़े भाई की भूमिका में चुनाव लड़ेगी बल्कि इसके साथ ही चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के उम्मीदवारों के चयन में भी अपना दखल बनाए रखेगी। भाजपा की यह पूरी कोशिश होगी कि 139 के अपने कोटे वाली सीटों पर ही शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत के लिए जरूरी 122 सीटें हासिल कर ली जाए। अगर पार्टी अपनी रणनीति में कामयाब हो जाती है तो फिर नीतीश कुमार की मोलभाव करने की राजनीतिक क्षमता खत्म हो जाएगी। भाजपा बड़े आराम से चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की मदद से बिहार में अपना मुख्यमंत्री बना लेगी। 

बिहार की राजनीति के बारे में एक बात तो शीशे की तरह साफ है कि नीतीश कुमार से लेकर लालू यादव और तेजस्वी तक, चिराग पासवान से लेकर भाजपा तक, सब एक दूसरे की मंशा से वाकिफ है। सब बेहतर मौके का इंतजार कर रहे हैं और बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे ही यह बताएंगे कि चुनाव के बाद कौन किसके साथ रहेगा और राज्य में किसकी सरकार बनेगी ? 

-संतोष पाठक

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।)

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