By अभिनय आकाश | Aug 27, 2026
पाकिस्तान में लगातार बढ़ते खतरे, विद्रोह, आतंकवाद के बीच ऐसा लगता है कि फ्रांस ने पाकिस्तान को एक बड़ा गच्चा दे दिया है। पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में फ्रांस की करीब पांच दशक पुरानी राजनिक मौजूदगी खत्म हो गई। 1976 में शुरू हुआ फ्रांस का काउंसिलेट जनरल अब स्थाई रूप से बंद कर दिया जा रहा है। यानी कि अब कराची के फ्रांस काउंसिलेट पर ताला लटका हुआ दिखाई देगा। पाकिस्तान में फ्रांस के निव्त राजदूत निकोलस गेले ने एक विदाई समारोह में इसकी जानकारी दी है। विदाई समारोह में फ्रांस के राजदूत निकोलस गेले और कराची में फ्रांस के काउंसिल जनरल एलेक्सिस को सम्मानित भी किया गया। गेले ने पाकिस्तान में करीब 5 साल बिताने के बाद विदाई को भावुक पल बताया। उन्होंने कराची को एक जीवंत और लगातार बदला हुआ शहर बताया और कहा कि यह शहर उनकी यादों में हमेशा रहेगा।
अधिकारियों के मुताबिक काउंसलेट जनरल को बंद करना फ्रांस के उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत विदेशों में राजनैतिक मौजूदगी को कम खर्च वाला और ज्यादा सीमित बनाया जा रहा है। इसलिए कराची से काउंसलेट का हटाना पाकिस्तान के साथ फ्रांस के रिश्ते के खत्म होने के संकेत नहीं माने जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कारोबारी संपर्क आगे भी जारी रहेगा। लेकिन इस विषय से जुड़े हुए जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान में जिस तरह के खतरे बढ़ रहे हैं वैसे में फ्रांस अपनी मौजूदगी वहां कम से कम रखना चाहता है और यही वजह है कि वो इस तरह के कदम उठा रहा है। आपको मालूम है कि पाकिस्तान में सिर्फ पीओजेके में ही समस्या नहीं है। बल्कि खैबर पख्तून ख्वाब बलूचिस्तान के इलाके में पूरी तरह से पाकिस्तान की सरकार और सेना से वहां की आवाम बगावत कर रही है। इसके अलावा कराची हो, इस्लामाबाद हो हर जगह खतरा मंडरा रहा है।