By अभिनय आकाश | Oct 10, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क के हालिया फैसलों ने अनजाने में ही सही, वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कद को कई गुना मजबूत कर दिया है। सोशल मीडिया पर यह चर्चा गर्म है कि अमेरिकी दबाव की रणनीति भारत के सामने पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि भारत किसी भी महाशक्ति के दबाव में आकर फैसले नहीं लेता, जबकि घरेलू विपक्ष पर अक्सर विदेश नीति को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगते रहे हैं। एलन मस्क के रुख और बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक आर्थिक दबदबा भारत की संप्रभुता के आगे बेअसर है। मस्क के 'स्टारलिंक' प्रोजेक्ट ने अपने प्रभाव के दम पर श्रीलंका में महज 67 दिनों और भूटान में मात्र 35 दिनों के भीतर प्रवेश हासिल कर लिया था। लेकिन भारत में मामला बिल्कुल अलग रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा संप्रभुता को प्राथमिकता देते हुए बिना किसी जल्दबाजी के कड़े नियमों का पालन सुनिश्चित कराया। विडंबना यह है कि मुख्य विपक्षी दल, जो कभी स्टारलिंक का विरोध कर रहा था, आज उसी सेवा की वकालत करता नजर आ रहा है।
डॉनल्ड ट्रंप ने यूक्रेन, नाटो और यूरोपीय देशों को धोखा देते हुए कहा है कि अब अमेरिका रूस से डीजल खरीदेगा। अमेरिका 2027 तक लगातार अब रूस से डीजल खरीदने वाला है। ट्रंप ने कहा है कि समझौते के तहत रूस तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल अमेरिका को देगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन रूसी डीजल अमेरिका भेजा जाएगा। डॉनल्ड ट्रंप ने यूक्रेन नाटो और यूरोप को बिना बताए रूस से डील कर ली। अभी तक अमेरिका बोल रहा था कि भारत रूस से तेल खरीद कर जंग को फंड कर रहा है। मंदबुद्धि अमेरिका इतना गिर गया था कि रूस से तेल खरीदने के लिए उसने पीएम मोदी की पूजा का मजाक बनाया। यहां तक कह दिया कि तेल से मिले मुनाफे का फायदा भारत के ब्राह्मणों को हो रहा है। लेकिन अब अमेरिका कहां जाकर मुंह छिपाएगा? ट्रंप ने सितंबर में ही रूस पर प्रतिबंधों वाले कानून पर साइन किया है। इसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर ट्रंप ने 100% टेरिफ लगाने की बात कही थी। जिसमें भारत और चीन शामिल हैं। लेकिन अब अमेरिका खुद तेल खरीद रहा है।