By Ankit Jaiswal | Aug 13, 2026
केंद्र सरकार रेयर अर्थ से बनने वाले स्थायी चुंबकों के उत्पादन को बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इन चुंबकों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर पवन टर्बाइन, महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, विमानन और रक्षा प्रणालियों तक में होता है।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 नवंबर 2025 को इस योजना को मंजूरी दी थी। इसके लिए कुल 7,280 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। भारी उद्योग मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को योजना की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद 20 मार्च 2026 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल के जरिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए।
यह योजना कुल सात साल तक चलेगी। इसमें शुरुआती दो साल उत्पादन इकाइयों को तैयार करने में लगाए जाएंगे। इसके बाद पांच साल तक बिक्री के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। यानी कंपनियों को केवल कारखाना लगाने के लिए ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि तैयार चुंबकों की बिक्री के आधार पर भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
बता दें कि रेयर अर्थ स्थायी चुंबक आधुनिक उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर, पवन ऊर्जा संयंत्रों की मशीनरी, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रक्षा क्षेत्र में इनकी जरूरत होती है। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इन चुंबकों की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है।
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस क्षेत्र में चीन की मजबूत पकड़ है। वैश्विक दुर्लभ मृदा और उससे जुड़े चुंबक आपूर्ति तंत्र में चीन का दबदबा है। वर्ष 2025 में चीन की ओर से लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों के कारण दुनिया के कई उद्योगों को आपूर्ति में परेशानी का सामना करना पड़ा था। इससे यह साफ हुआ कि दूसरे देशों से आने वाले इन जरूरी सामानों पर ज्यादा निर्भरता उद्योगों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
सरकार अब देश में रेयर अर्थ के कच्चे पदार्थ से लेकर तैयार चुंबक तक पूरी उत्पादन श्रृंखला विकसित करना चाहती है। इसका उद्देश्य सिर्फ आयात घटाना नहीं, बल्कि भविष्य में देश को इस क्षेत्र में मजबूत उत्पादन केंद्र बनाना भी है।
अगर योजना तय समय पर आगे बढ़ती है तो इससे इलेक्ट्रिक वाहन, अक्षय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग को देश में ही जरूरी सामग्री मिलने में मदद मिल सकती है। साथ ही आपूर्ति में होने वाली बाहरी रुकावटों का असर कम करने और भारत की औद्योगिक सुरक्षा मजबूत करने में भी यह योजना अहम भूमिका निभा सकती हैं।