भारत के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा प्रतिभा पलायन, क्या हैं ब्रेन ड्रेन को रोकने के उपाय?

By अभिनय आकाश | Dec 28, 2021

पराग अग्रवाल के ट्विटर के नए सीईओ के रूप में पदभार संभालने के बाद, गीता गोपीनाथ अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पहले उप प्रबंध निदेशक के रूप में अपनी नई भूमिका निभाने के लिए चयनित हुईं। दोनों ने बहुत ही शीर्ष प्रमुख वैश्विक संगठन की सेवा करने वाले भारतीयों की बढ़ती सूची में अपना नाम जोड़ा है। सुंदर पिचाई, सत्या नडेला, शांतनु नारायण, अरविंद कृष्णा दुनिया में कई और भारतीय दिग्गज हैं जो टॉप टेक कंपनियों की कमान संभाल रहे हैं। भारत की शिक्षा प्रणाली को काफी मजबूत माना जाता है और जो बेहद प्रतिभाशाली और बुद्धिमान युवा पैदा करते हैं। जिनकी मांग दुनिया के कोने-कोने में है। भारतीयों को बाहरी देशों में अच्छे स्तर के जीवन के साथ अच्छे पैकेज प्राप्त होते हैं और इस तरह वे अपने देश छोड़ देते हैं। इनकी उपलब्धियों को भारतीयों ने सराहा है। वहीं एक वर्ग के बीच ये बहस का भी मुद्दा बना। 

चलिए आपको पहले थोड़ा आंकड़े दिखाते हैं-

2016 में  6 लाख भारतीयों ने अपनी भारतीय नागरिकता त्यागी है

2014 तक 24000 मिलिनियर ने भारत छोड़ा

ब्रेन ड्रेन क्या है

ब्रेन ड्रेन एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल शिक्षित और प्रतिभाशाली व्यक्तियों के एक महत्वपूर्ण प्रवासन के लिए किया जाता है। जब प्रतिभाशाली एवं शिक्षित व्यक्ति बेहतर सुख-सुविधाओं को पाने के लिए अपना देश छोड़कर दूसरे देश में नौकरी या व्यापार करते हैं, तो उसे ब्रेन ड्रेन या प्रतिभा पलायन कहा जाता है। ब्रेन ड्रेन सबसे ज्यादा विकासशील देशों में देखने को मिलता है। भारत इसका एक उदाहरण है। प्रतिभा पलायन शब्द की उत्पत्ति यूरोप से हुई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के बहुत से वैज्ञानिक एवं इंजीनियरों ने उत्तरी अमेरिका की तरफ रुख किया। जिसका एकमात्र कारण सुख सुविधा एवं सुरक्षा भी था।

भारत में सबसे ज्यादा प्रतिभा पलायन

 वर्तमान समय में भारत से सबसे ज्यादा पलायन किया जा रहा है। उत्तरी अमेरिका में भारत के 38% डॉक्टर, 12% वैज्ञानिक तथा 30% इंजीनियर अमेरिका में रह रहे हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में लगभग 35% वैज्ञानिक भारतीय हैं। विश्व प्रसिद्ध व्यक्ति सुंदर पिचाई, नेल्सन मंडेला, विनोद खोसला, अजय भट्ट, शांतनु नारायण तथा सबीर भाटिया आदि प्रतिभाशाली व्यक्ति अमेरिका में रह रहे हैं।

कहां से अत्यधिक प्रवासी आए

 देश  संख्या
 भारत 3.12 मिलियन
 चीन 2.25 मिलियन
 फिलीपिंस 1.89 मिलियन
 यूके 1.75 मिलियन
 जर्मनी 1.47 मिलियन
 पोलैंड 1.20 मिलियन
 मेक्सिको 1.14 मिलियन
 रूस 1.06 मिलियन

प्रतिभा पलायन की वजह

टकराव

राजनीतिक अस्थिरता

अवसरों की कमी

स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं

कम सैलरी पैकेज

व्यापार से संबंधित समस्याएं

 ब्रेन गेन

वहीं इसके उलट चीजों को देखने की कोशिश करें तो बड़े पैमाने पर अप्रवासन  का सीधा सा मतलब है कि पश्चिमी देश कुशल श्रम से पिछले एक दशक से ब्रेन गेन से लाभांवित हुआ है। 1970 के दौर में कई युवा भारतीयों ने केवल भारत में नौकरी पाने के लिहाजे से अतिविशिष्ट और सब्सिडाइज संस्थानों से ग्रैजुएशन किया। लेकिन उचित वेतन प्राप्त नहीं होने की वजह से उन्होंने देश छोड़ना शुरू कर दिया। ताकि डिग्री और स्किल हासिल कर अपनी क्षमताओं और प्रतिभा को निखार सके। इसी तरह गल्फ देशों में काम करने वाले शॉर्ट टर्म कॉन्ट्रैक्ट वर्कर कभी भारत नहीं लौटे। 

ब्रेन ड्रेन को रोकने के उपाय- किसी भी देश के लिए ब्रेन ड्रेन एक नकारात्मक पहलू होता है। किसी भी देश का ब्रेन ड्रेन होना उस देश की शक्ति को कमजोर कर देता है। इस प्रकार ब्रेन ड्रेन को रोकने के निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं –

विभिन्न महंगे करो से राहत जो ब्रेन ड्रेन को रोकने का एक आसान तरीका है।

अपने देश में औद्योगीकरण का विकास करना।

देश में उच्च शिक्षण संस्थानों का निर्माण करना।

अनुसंधान एवं उच्च कोटि की लेबोरेटरी की व्यवस्था करना।

प्राइवेट नौकरियों में स्थिरता लाना तथा मिनिमम सैलरी को स्थिर करना।

 बहरहाल, ऐसे में अगर भारत को वैश्विक महाशक्ति बनना है तो उसे अपने यहां की प्रतिभाओं को बाहर जाने से रोकना होगा। यह तभी हो पाएगा, जब उन्हें देश में उभरने का मौका मिले। उसे ऐसे हालात बनाने होंगे, जिससे जो लोग भारत के बिल गेट्स, जेफ बेजोस और मार्क जकरबर्ग हो सकते हैं, वे देश छोड़कर न जाएं। तभी, विदेशी प्रतिभाएं भी हमारे यहां आएंगी और हम भी ऐसी कंपनियां और संस्थान खड़े कर पाएंगे, जो दुनिया का भविष्य तय कर सकेंगी।

 -अभिनय आकाश

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