अचानक छूटने वाली बेकाबू Laughter के पीछे काम करते हैं Brain के दो अलग तंत्र, रिसर्च में खुलासा

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 19, 2026

(सोफी स्कॉट - यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन एवं फॉस्टो कैरुआना - यूनिवर्सिटी ऑफ पारमा) लंदन, 19 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) कभी-कभी हंसी ऐसी छूटती है कि लाख कोशिशों के बावजूद रुकने का नाम नहीं लेती। हैरानी की बात यह है कि इसके पीछे सिर्फ कोई मजेदार बात नहीं, बल्कि मस्तिष्क की जटिल प्रक्रियाएं भी होती हैं। एक नए शोध के मुताबिक, बेकाबू होकर हंसने और बातचीत के दौरान सामान्य रूप से हंसने के पीछे मस्तिष्क के अलग-अलग तंत्र काम करते हैं। कई बार हंसी ऐसे समय पर आती है, जब इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं होती। हममें से एक के साथ ऐसा उस समय हुआ, जब वह तलाक के एक अप्रिय मामले के दौरान अपने मित्र के साथ पारिवारिक अदालत गया था। हंसी पर काबू पाने की तमाम कोशिशें नाकाम होने के बाद उसे बाथरूम की ओर भागना पड़ा। जाहिर है, मित्र को उस समय इस तरह के भावनात्मक सहयोग की उम्मीद तो नहीं थी। ऐसा ही एक चर्चित उदाहरण 1991 का है, जब क्रिकेट कमेंटेटर ब्रायन जॉनस्टन और जोनाथन एग्न्यू मैच का हाल सुनाते समय इतना हंसने लगे कि बोल ही नहीं पाए। लेकिन ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे मस्तिष्क में क्या प्रक्रिया होती है?

----- मस्तिष्क के दो अलग-अलग तंत्र ----- हंसी पैदा करने वाले मस्तिष्क के तंत्र को समझना आसान नहीं है। हंसते समय लोगों के शरीर में काफी हलचल होती है, जिससे एफएमआरआई जैसी तकनीकों से मस्तिष्क का अध्ययन करना मुश्किल हो जाता है। प्रयोगशाला में लोगों को स्वाभाविक रूप से हंसाना भी चुनौतीपूर्ण है। मिलान के निगुआर्दा अस्पताल में मिर्गी के मरीजों के मस्तिष्क में चिकित्सकीय उद्देश्यों से विद्युत उत्तेजना देने की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि मस्तिष्क के पांच या छह हिस्सों को उत्तेजित करने पर मरीज जोर-जोर से हंसने लगते हैं। हंसी से संबंधित अध्ययनों की समीक्षा में सामने आया कि मस्तिष्क के दो अलग-अलग तंत्र इसमें भूमिका निभाते हैं। पहले तंत्र को उत्तेजित करने पर व्यक्ति को खुशी महसूस होती है और वह बेकाबू होकर हंसने लगता है। दूसरे तंत्र की उत्तेजना से हंसी आती है, लेकिन बोलने में परेशानी हो सकती है और इसके साथ खुशी की भावना होना जरूरी नहीं है।

----- हंसी का विकास और शरीर पर असर ----- स्वाभाविक और बेकाबू हंसी से जुड़ी पहली प्रणाली मनुष्यों और अन्य स्तनधारी जीवों में आवाज निकालने के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क तंत्र से मिलती-जुलती है। विकास की दृष्टि से यह पुरानी प्रणाली है और इसकी जड़ें जानवरों की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं तथा खेल-कूद के दौरान होने वाली गतिविधियों में हैं। इसके सक्रिय होने पर शरीर में कई रासायनिक प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। इनमें ओपिओइड प्रणाली भी शामिल है, जो आनंद और संतुष्टि की भावना पैदा करने में मदद करती है। दर्द के प्रति संवेदनशीलता को नियंत्रित करने वाली सेरोटोनिन प्रणाली भी प्रभावित हो सकती है। इससे बेकाबू हंसी के दौरान कुछ समय के लिए शारीरिक दर्द कम महसूस होने की संभावना समझ में आती है। इसके विपरीत, स्वेच्छा से आने वाली हंसी का संबंध मस्तिष्क के उस तंत्र से है, जो बोलने जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। बातचीत के दौरान यह हंसी सहमति जताने और सामाजिक संबंध मजबूत करने में मदद करती है। वर्ष 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि बातचीत के दौरान हंसते समय मुख और गले के आकार में होने वाले बदलाव बोलते समय होने वाले बदलावों से मिलते-जुलते हैं। इसके विपरीत, बेकाबू हंसी के दौरान ये बदलाव बोलने के तरीके से काफी अलग होते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि स्ट्रोक से स्वेच्छा से हंसने और बोलने को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क तंत्र को नुकसान पहुंचता है, तो व्यक्ति को बोलने में गंभीर परेशानी हो सकती है, जबकि वह हंसने और रोने में सक्षम रह सकता है। हंसी का विज्ञान अब सामाजिक व्यवहार के विकास, आपसी जुड़ाव, सहानुभूति, दर्द को नियंत्रित करने और बातचीत में भाषा की भूमिका जैसी प्रक्रियाओं को समझने में मदद कर रहा है।

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