New Delhi में BRICS मंच ने उठाई Global South की आवाज, संयुक्त राष्ट्र में बदलाव की अपील

By अभिनय आकाश | Oct 27, 2026

नई दिल्ली में मंगलवार को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का समापन हुआ। इसमें सदस्य देशों के पीठासीन अधिकारियों और संसदीय प्रतिनिधियों ने "जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को बढ़ावा देना" (Fostering Parliaments for People-Centric Development) विषय के तहत एक व्यापक संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया। दो दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के विधायी नेताओं ने हिस्सा लिया। 'नई दिल्ली घोषणा-पत्र' (NDD) की सहमति को दोहराते हुए, सदस्य देशों की संसदों ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा ढांचे में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग की, ताकि इसे "अधिक न्यायपूर्ण, समान, लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिमूलक, प्रभावी और कुशल" बनाया जा सके। इस संदर्भ में उन्होंने विशेष रूप से NDD के पैराग्राफ 13 का उल्लेख किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वैश्विक शासन व्यवस्था में 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की आवाज बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित हो।

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आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों पर चर्चा करते हुए, घोषणापत्र में "अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत, एकतरफा और दबाव डालने वाले उपायों" की निंदा की गई है। इसमें कहा गया है कि इस तरह के एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और 'सेकेंडरी सैंक्शंस' (अन्य देशों पर लगाए गए प्रतिबंध) का मानवाधिकारों, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और विकास के अधिकार पर बहुत बुरा असर पड़ता है। क्षेत्रीय संघर्षों के संदर्भ में, मंच ने "मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता" जताई। साथ ही, अधिकतम संयम बरतने, स्थिति को और बिगाड़ने वाले कदमों से बचने, और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया। इसके अलावा, प्रतिनिधियों ने "इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपने अटूट समर्थन" को दोहराया। उन्होंने 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (दो-राज्य समाधान) का समर्थन किया, जिसमें दोनों देश शांति और सुरक्षा के साथ एक-दूसरे के बगल में रह सकें। साथ ही, फिलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय के अधिकार, स्वतंत्रता और एक स्वतंत्र व संप्रभु राज्य के अधिकार पर जोर दिया। घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सभी उल्लंघनों की कड़ी निंदा की गई है—जिसमें नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और मानवीय सहायता कर्मियों पर जानबूझकर किए गए हमले शामिल हैं—और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

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