दुनिया के सबसे बड़े सीमा सुरक्षा बल BSF से आखिर क्यों थर-थर काँपता है दुश्मन?

By नीरज कुमार दुबे | Dec 01, 2021

सीमा सुरक्षा बल यानि (बीएसएफ) का आज स्थापना दिवस है। देश की सुरक्षा के साथ ही यह बल आपदा और संकट की घड़ी में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। अपने अदम्य साहस और पेशेवराना अंदाज के लिए जाने जाने वाले इस बल से दुश्मन थर-थर काँपता है। हम आपको बता दें कि बीएसएफ की स्थापना 1 दिसम्बर 1965 को भारत की सीमाओं की रक्षा और अन्तरराष्ट्रीय अपराध को रोकने के लिए की गई थी। यह सुरक्षा बल केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है। खासतौर पर बांग्लादेश की आज़ादी में 'सीमा सुरक्षा बल' की अहम भूमिका अविस्मरणीय है।

BSF की जरूरत देश को क्यों महसूस हुई?

आइये सबसे पहले जानते हैं बीएसएफ के गठन की आवश्यकता क्यों पड़ी थी? दरअसल 1965 तक पाकिस्तान के साथ भारत की सीमाओं की सुरक्षा राज्य सशस्त्र पुलिस बटालियन द्वारा की जाती थी। पाकिस्तान ने कच्छ में 09 अप्रैल 1965 को सरदार पोस्ट, चार बेट एवं बरिया बेट पर हमला किया। इस हमले से यह बात सामने आई कि राज्य सशस्त्र पुलिस बटालियन सशस्त्र आक्रमण का सामना करने में अपर्याप्त है जिसके कारण भारत सरकार को केंद्र के अधीन एक विशेष सीमा सुरक्षा बल की जरूरत महसूस हुई जो सशस्त्र और प्रशिक्षित बल होगा और पाकिस्तान सीमा के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी करेगा। सचिवों की समिति की सिफारिशों के परिणामस्वरूप, सीमा सुरक्षा बल 1 दिसम्बर 1965 को अस्तित्व में आया और केएफ रूस्तमजी इसके पहले प्रमुख और संस्थापक थे। 1965 में कुल 25 बटालियन के साथ सीमा सुरक्षा बल का गठन हुआ और समय के साथ पंजाब, जम्मू व कश्मीर, नार्थ ईस्ट में आतंकवाद की रोकथाम के लिए सीमा सुरक्षा बल का विस्तार होता रहा। वर्तमान समय में सीमा सुरक्षा बल की 192 बटालियन (03 एन.डी.आर.एफ बटालियन सहित) और 07 आर्टी रेजिमेंट भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश की अन्तराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा में तैनात हैं। इसके अतिरिक्त सीमा सुरक्षा बल कश्मीर घाटी में घुसपैठ, नार्थ ईस्ट क्षेत्र में आंतरिक सुरक्षा, ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ में नक्सली विरोधी अभियान और भारत-पाकिस्तान एवं भारत-बांग्लादेश अन्तराष्ट्रीय सीमा पर एकीकृत जांच चौकी में तैनात है।

युद्ध काल में सीमा सुरक्षा बल की भूमिका क्या होती है?

युद्ध के समय बीएसएफ की क्या भूमिका होती है यदि इस पर बात करें तो आपको बता दें कि सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी होती है कि कम खतरे वाले सेक्टरों में तब तक मोर्चा संभाले रखे जब तक किसी सेक्टर विशेष में तेज हमला शुरू न हो जाए। युद्ध की स्थिति में सीमा सुरक्षा बल का यह भी कार्य होता है कि महत्वपूर्ण संस्थानों विशेषतया हवाई अड्डों को दुश्मन के कमान्डो/छतरीधारी सैनिकों या हवाई हमलों से बचाया जाये। इसके अलावा शत्रु के अर्द्ध सैनिक बलों या अनियमित सैनिकों के खिलाफ सीमित आक्रामक कार्रवाई की जाये। साथ ही बीएसएफ युद्ध के समय जिम्मेदारी वाले ऐसे क्षेत्र में मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है जहां के रास्ते उसे ज्ञात हों। सेना के नियंत्रणाधीन शत्रु के क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखना, युद्ध बंदियों के पिंजडों की सुरक्षा करना, शरणार्थियों के नियंत्रण में सहायता और घुसपैठ रोकना बीएसएफ का ही काम है।

बीएसएफ स्थापना दिवस पर आइये आपको जरा इस सुरक्षा बल के बारे में कुछ और महत्वपूर्ण जानकारियां देते हैं।

-सीमा सुरक्षा बल हर वर्ष संयुक्त राष्ट्र मिशन में अपने जवानों को भेजकर विभिन्न अभियानों में सहयोग करती है।

-1999 में कारगिल युद्ध के दौरान, सीमा सुरक्षा बल पर्वतों की चोटियों पर आर्मी के साथ सामंजस्य बिठाते हुए देश की सुरक्षा में तैनात रही।

-सीमा सुरक्षा बल के जवान पिछले कई वर्षों से मणिपुर में आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी में तैनात हैं तथा इन क्षेत्रों में अलगाववाद के विरुद्ध सफलतापूर्वक कार्रवाई कर रहे हैं।

-सीमा सुरक्षा बल पिछले कई वर्षों से छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा में नक्सल विरोधी अभियान में तैनात है एवं सफलतापूर्वक इन क्षेत्रों को नक्सल मुक्त कराया जा रहा है।

-26 जनवरी 2001 को गुजरात में आये भूकंप के दौरान सीमा सुरक्षा बल ने ही सबसे पहले पहुँच कर प्रभावित लोगों की सहायता की थी।

-सीमा सुरक्षा बल प्रसिद्ध करतारपुर कोरिडोर का सुरक्षा कार्य भी देख रही है।

-सीमा सुरक्षा बल ने कोविड महामारी के समय सीमा पर रहने वाले लोगों को जागरूक किया व उन्हें जरूरी सहायता प्रदान की।

-प्राकृतिक आपदाओं के समय सीमा सुरक्षा बल अपने तैनाती के इलाकों में सहायता उपलब्ध कराती है। कश्मीर में 2014 में आयी बाढ़ हो, केरल में 2018 में आई भीषण बाढ़ हो, 2013 में केदारनाथ क्षेत्र में हुई त्रासदी हो...चाहे अन्य घटनाएं। बीएसएफ ने सदैव मानवीय राहत अभियानों में बढ़-चढ़कर मदद की है।

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बीएसएफ को लेकर हाल में क्या विवाद हुआ?

हाल के दिनों में विश्व के इस सबसे बड़े सीमा सुरक्षा बल को विवादों में घेरने का काम भी किया गया। केंद्र सरकार ने हाल में पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र पूर्व के 15 किलोमीटर दूरी से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया जबकि गुजरात में यह सीमा घटाकर 80 किलोमीटर से 50 किलोमीटर कर दी गई जबकि राजस्थान में सीमा को 50 किलोमीटर पर अपरिवर्तित रखा गया। इस मुद्दे पर विवाद शुरू हो गया क्योंकि विपक्ष शासित पंजाब और पश्चिम बंगाल ने इस कदम की निंदा की और उनकी संबंधित विधानसभाओं ने केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। इस मुद्दे पर जब बीएसएफ महानिदेशक पंकज कुमार सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि असम और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में ‘जनसांख्यिकीय संतुलन’ बिगड़ गया है और शायद यही कारण है कि केंद्र ने हाल में बल के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाया है। बीएसएफ महानिदेशक का साफ कहना है कि बल अपने निर्धारित कार्य को ही कर रहा है और समानांतर पुलिस के रूप में कार्य करने की कोशिश नहीं कर रहा। सीमा सुरक्षा बल में सिर्फ पुरुष ही नहीं महिलाओं की भी अच्छी खासी भागीदारी है। इस समय बल में लगभग 7,500 महिला कर्मी हैं, जिनमें से अधिकतर को सीमा फाटकों को पार करने वाली महिलाओं की तलाशी के लिए तैनात किया गया है।

बहरहाल, जहां तक बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने पर हो रहे राजनीतिक बवाल की बात है तो केंद्र सरकार ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कह दिया है कि कुछ राज्यों में सीमा सुरक्षा बल का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने की अधिसूचना को लेकर पश्चिम बंगाल और पंजाब की सरकारों ने जो आशंकाएं व्यक्त की हैं, वे बेबुनियाद हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि बीएसएफ के क्षेत्रीय अधिकार का विस्तार करने से राज्य पुलिस के साथ सीमापार अपराधों पर नियंत्रण और अधिक बेहतर तथा प्रभावी हो जाएगा। नित्यानंद राय ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2014 की अधिसूचनाओं का संशोधन किया है और 11 अक्टूबर, 2021 को एक अधिसूचना के माध्यम से कुछ राज्यों में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ा दिया है।

- नीरज कुमार दुबे

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