By एकता | Aug 23, 2026
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने जाति-आधारित आरक्षण को खत्म कर इसे केवल आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसा कोई भी कदम देश हित में नहीं होगा। रविवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव और वंचना को दूर करने के लिए किया गया था।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आरक्षण-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए बसपा प्रमुख ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी या कांग्रेस का कोई भी अन्य नेता प्रदर्शनकारियों को अपना रुख समझाने तक नहीं गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के प्रति कांग्रेस की आरक्षण-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
मायावती ने दावा किया कि देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था पहले से ही लागू है, लेकिन सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों को भी इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है और यह व्यवस्था काफी हद तक अपर्याप्त साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक भ्रष्ट और जातिवादी सरकारी व्यवस्था के कारण आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को जमीन पर ठीक से लागू नहीं होने दिया गया, जिसके चलते आजादी के दशकों बाद भी ये वर्ग गरीबी, उत्पीड़न और सामाजिक पूर्वाग्रह का सामना कर रहे हैं।
बसपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे आरक्षण का विरोध करने वाले तत्वों को किसी भी तरह का आश्रय या संरक्षण न दें। इसके साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और आम जनता से अपील की कि इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति करने से बचें।