Budget 2026: चुनावी बंगाल के लिए 'पूर्वोदय' और इंफ्रास्ट्रक्चर की सौगात, टीएमसी ने बताया 'राजनीतिक औजार'

By रेनू तिवारी | Feb 01, 2026

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में पश्चिम बंगाल के लिए बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इन प्रस्तावों को केंद्र की 'चुनावी रणनीति' के तौर पर देखा जा रहा है। जहाँ भाजपा इन्हें बंगाल के कायाकल्प का जरिया बता रही है, वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे 'झूठ का पुलिंदा' और भेदभावपूर्ण करार दिया है।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट में पश्चिम बंगाल के दानकुनी को गुजरात के सूरत से जोड़ने वाले एक नए समर्पित मालगाड़ी कॉरिडोर, दुर्गापुर में एक सुव्यवस्थित केंद्र के साथ ‘पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे’ के विकास और ‘पूर्वोदय’ के पांच राज्यों में कुल पांच पर्यटन स्थलों के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है। भाजपा इसे चुनाव से पहले पूर्वी भारत में विकास-आधारित राजनीति के अपने विमर्श को मजबूत करने वाला कदम मान रही है। दानकुनी–सूरत मालगाड़ी कॉरिडोर को पर्यावरण के अनुकूल माल परिवहन को बढ़ावा देने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने की पहल के रूप में पेश किया गया है। यह इस बजट में बंगाल के लिए राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण वादा माना जा रहा है।

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केंद्र सरकार का तर्क है कि अंतर्देशीय जल परिवहन और एकीकृत कॉरिडोर के जरिये माल ढुलाई करने से राज्य में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। भाजपा लंबे समय से बंगाल को तृणमूल कांग्रेस के शासन में नीतिगत ठहराव का शिकार बताती रही है। बजट में पूर्वोदय के तहत आने वाले राज्यों में पर्यटन स्थलों के विकास और 4,000 ई-बसों की व्यवस्था का भी प्रस्ताव किया गया है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की तीखी प्रतिक्रिया के बाद इस बजट के राजनीतिक निहितार्थों पर चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी ने इसे केंद्र–राज्य संबंधों में कथित भेदभाव का एक और प्रमाण बताया।

बंगाल के लिए बजट की 5 मुख्य घोषणाएं

केंद्र सरकार ने 'मिशन पूर्वोदय' के जरिए बंगाल को विकास के केंद्र में लाने का रोडमैप पेश किया है:

दानकुनी-सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर: बंगाल के दानकुनी को गुजरात के सूरत से जोड़ने के लिए एक नया मालगाड़ी गलियारा (DFC) प्रस्तावित किया गया है। यह पूर्वी और पश्चिमी भारत के औद्योगिक केंद्रों को आपस में जोड़ेगा।

वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल: उत्तर बंगाल की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन रूट) की घोषणा की गई है।

ईस्ट कोस्ट औद्योगिक गलियारा (दुर्गापुर): दुर्गापुर को एक प्रमुख 'इंडस्ट्रियल नोड' के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

4,000 ई-बसें और जलमार्ग: पूर्वोदय पहल के तहत बंगाल सहित पूर्वी राज्यों में 4,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने और 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग चालू करने का प्रस्ताव है।

पर्यटन और बौद्ध सर्किट: 'पूर्वोदय' के पांच राज्यों में 5 नए पर्यटन स्थल विकसित होंगे, साथ ही सिलीगुड़ी जैसे क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने का प्रयास होगा।

टीएमसी ने केंद्र पर पुराने फैसलों को नए लाभों की तरह पेश करने का आरोप लगाया। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर केवल सुर्खियां बटोरने वाली घोषणाएं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पिछले पांच वर्षों से हम यही बात कह रहे हैं। यदि केंद्र एक श्वेतपत्र जारी करके यह साबित कर दे कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद बंगाल में मनरेगा के किसी एक जॉब-कार्ड धारक को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से पैसा मिला है, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।”

बनर्जी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना और ग्रामीण सड़क योजना जैसी प्रमुख केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली धनराशि पिछले चुनावों के बाद से ही लंबित है। उन्होंने कहा कि बजट में की गई बुनियादी ढांचा संबंधी घोषणाएं हकीकत को नहीं छिपा सकतीं। दूसरी ओर, भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा, “बजट में बंगाल के बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दिया गया है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।”

उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी और औद्योगिक परियोजनाओं से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और निवेश आकर्षित होगा, खासकर उत्तर और पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्रों में। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बजट में बंगाल पर दिए गए जोर को भाजपा की व्यापक चुनावी रणनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इस संबंध में एक अर्थशास्त्री ने कहा, “बजट आवंटन राजनीति को किनारे रखकर तय नहीं किए जाते।’’

उन्होंने कहा कि जब बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव करीब होते हैं, तो उस राज्य पर अधिक ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि संघीय व्यवस्था में केंद्रीय बजट एक शक्तिशाली उपकरण माना जाता है। वहीं, एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि चुनाव वाले राज्यों पर बजट में अतिरिक्त ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा, “बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और कल्याणकारी घोषणाएं केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के इरादों को दर्शाती हैं। इसके बाद मतदाता यह परखते हैं कि ये वादे विश्वसनीय हैं या सिर्फ प्रतीकात्मक।

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