Smartphone Prices में भारी उछाल से Budget Phone बाजार पस्त, चीनी कंपनियों की Market Share 2020 के निचले स्तर पर

By Ankit Jaiswal | Jul 17, 2026

भारत के स्मार्टफोन बाजार में इस समय सुस्ती का दौर देखने को मिल रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों और कमजोर उपभोक्ता मांग का असर अब मोबाइल कंपनियों के कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। मौजूद जानकारी के अनुसार जून तिमाही में चीनी मोबाइल कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी घटकर वर्ष 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। वहीं कुल स्मार्टफोन आपूर्ति में भी पिछले छह वर्षों की सबसे बड़ी जून तिमाही गिरावट दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि ओप्पो, वीवो, शाओमी, रियलमी, वनप्लस, आईक्यू और पोको जैसी चीनी कंपनियों की बिक्री का बड़ा हिस्सा कम कीमत वाले मोबाइल फोनों से आता है। लेकिन महंगाई और कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण इन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में कमी दर्ज की गई। इसके जवाब में कई कंपनियों ने कम कीमत वाले ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए चौथी पीढ़ी की मोबाइल सेवा वाले नए मॉडल बाजार में उतारे हैं, जबकि लंबी अवधि में पांचवीं पीढ़ी की मोबाइल सेवा वाले फोन ही बाजार की मुख्य दिशा बने रहने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2025 के बाद से मोबाइल में इस्तेमाल होने वाली डीआरएएम और नैंड मेमोरी की कीमतों में लगभग चार गुना तक बढ़ोतरी हो चुकी है। इसी वजह से लगभग सभी बड़ी कंपनियों ने कई चरणों में अपने मोबाइल फोन की कीमतें बढ़ाईं। तिमाही के अंत तक औसत स्मार्टफोन की कीमत करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ गई।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के वरिष्ठ विश्लेषक प्रचिर सिंह का कहना है कि बाजार पर एक साथ मांग और आपूर्ति दोनों तरफ से दबाव बना हुआ है। उनके अनुसार 15 हजार रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की आपूर्ति में सालाना आधार पर 45 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो इस श्रेणी की सबसे कमजोर स्थिति को दर्शाती है।

वहीं शोध निदेशक तरुण पाठक का मानना है कि यह दबाव पूरे वर्ष जारी रह सकता है। उनके अनुसार मेमोरी की कीमतें आने वाले महीनों में और बढ़ सकती हैं। इसी कारण वर्ष 2026 में कुल स्मार्टफोन बाजार में लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया गया है।

हालांकि प्रीमियम श्रेणी के मोबाइल फोन की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। आसान किस्तों और वित्तीय योजनाओं के कारण ग्राहकों के लिए महंगे फोन खरीदना पहले की तुलना में आसान हो गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुख्य खुदरा दुकानों के माध्यम से होने वाली आधे से अधिक स्मार्टफोन बिक्री गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों या मासिक किस्त योजनाओं के जरिए हुई है।

कंपनियों की बात करें तो वीवो 18 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर बनी रही, हालांकि उसकी कुल आपूर्ति में कमी आई। सैमसंग शीर्ष पांच कंपनियों में एकमात्र ऐसी कंपनी रही जिसने सालाना आधार पर 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसकी बड़ी वजह गैलेक्सी ए और प्रमुख एस श्रृंखला के मोबाइल फोनों की मजबूत मांग रही।

ओप्पो 14 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहा। वहीं शाओमी और उसकी पोको श्रृंखला तथा रियलमी शीर्ष पांच में शामिल रहे, लेकिन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण इनकी आपूर्ति में गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर एप्पल की आपूर्ति में 3 प्रतिशत की कमी रही। हालांकि आईफोन 17 श्रृंखला की अच्छी मांग के बावजूद सीमित उपलब्धता के कारण कंपनी अपेक्षित वृद्धि हासिल नहीं कर सकी।

उभरती कंपनियों में नथिंग ने सबसे तेज वृद्धि दर्ज की। कंपनी की आपूर्ति सालाना आधार पर 105 प्रतिशत बढ़ी, जिसका प्रमुख कारण फोन 4ए श्रृंखला की अच्छी मांग और इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की मुख्य प्रायोजक बनने से मिली पहचान रही। वहीं 45 हजार रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम मोबाइल फोनों की श्रेणी में गूगल पिक्सल ने 68 प्रतिशत की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की, जिसे मजबूत प्रचार, खुदरा विस्तार और स्थिर कीमतों का लाभ मिला है।

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