By एकता | Feb 05, 2026
बृहस्पतिवार को संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा देखने को मिला। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का हवाला देना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली। इसके विरोध में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट (बहिर्गमन) किया। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतंत्र को सही से चलने नहीं दे रही है।
दूसरी ओर, लोकसभा में हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना प्रधानमंत्री के जवाब के ही ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी कर रहे थे, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित हुई। चीन सीमा विवाद और सांसदों के निलंबन जैसे मुद्दों पर पिछले कई दिनों से संसद में गतिरोध बना हुआ है।
| Today 13:14 | राज्यसभा से विपक्षी सदस्यों ने किया बहिर्गमनराज्यसभा में बृहस्पतिवार को नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की किताब के अंश उद्धृत करने की अनुमति नहीं दी गई जिसके बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। उच्च सदन की बैठक शुरू होने के कुछ बाद कांग्रेस सदस्यों ने मांग की कि पहले सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने दिया जाए। आसन की अनुमति से खरगे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संसद के दो सदन हैं, एक लोकसभा और दूसरा सदन राज्यसभा है। खरगे ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्षको बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। |
| Today 13:14 | राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारितलोकसभा ने बृहस्पतिवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके तत्काल बाद ही सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई। धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में हुई चर्चा का प्रधानमंत्री द्वारा सदन में जवाब देने की परंपरा है, लेकिन गतिरोध की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जवाब लोकसभा में नहीं हुआ और प्रस्ताव को पारित कर दिया गया। विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के कारण एक बार के स्थगन के बाद बैठक दोपहर 12 बजे शुरू हुई तो अध्यक्ष ओम बिरला ने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कराए। |
| Today 13:13 | निलंबित सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कियासंसद के वर्तमान बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किये गये लोकसभा के आठ सदस्यों ने बृहस्पतिवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया। इन सांसदों ने संसद के मकर द्वार के निकट सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। इन सांसदों ने हाथ में एक बड़ा बैनर ले रखा था जिस पर ‘‘पीएम इज कंप्रोमाइज्ड’’ लिखा हुआ था। उन्होंने ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘नरेन्द्र मोदी, सरेंडर मोदी’ के नारे लगाए। इन सांसदों ने बुधवार को भी संसद परिसर में प्रदर्शन किया था। सदन में आसन की ओर कागज फेंकने के कारण मंगलवार को विपक्ष के आठ सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एस. वेंकटेशन शामिल हैं। |
| Today 13:13 | कांग्रेस का कटाक्ष : संसद ‘मन की बात’ के लिए नहीं हैकांग्रेस ने संसद में जारी गतिरोध के बीच बृहस्पतिवार को सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह ‘मन की बात’ वाली सोच से सदन चलाना चाहती है, लेकिन सदन ‘मन की बात’ के लिए नहीं, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की आवाज सुनने के लिए है। मुख्य विपक्षी दल ने इस बात पर भी जोर दिया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं को भी बोलने का मौका मिलना चाहिए। लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक और वर्तमान बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित सांसद मणिकम टैगोर ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘सदन में दो आवाजें हैं, एक आवाज सत्तापक्ष की और दूसरी विपक्ष की है। लेकिन विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास हो रहा है। सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष की आवाज को मौका मिले।’’ उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘यह सरकार की ‘मन की बात’ वाली सोच है। ‘मन की बात’ रेडियो पर हो सकती है, लेकिन संसद ‘मन की बात’ के लिए नहीं है। संसद में विपक्ष के नेता बोलते हैं और फिर प्रधानमंत्री जवाब दे सकते हैं।’’ |