By अनन्या मिश्रा | Feb 23, 2026
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रदूषण के बीच अक्सर हम घर में भारीपन और थकान महसूस करते हैं। कई बार बिना किसी बीमारी के भी परिवार के सदस्य सुस्त और आलस भरे लगते हैं। साथ ही चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं। लेकिन वास्तु और आयुर्वेद के मुताबिक यह घर में जमा 'रुकी हुई एनर्जी' या फिर सूक्ष्म कीटाणुओं का असर हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको घर से निगेटिव एनर्जी को हटाने के कुछ उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं।
असल में गुग्गल और लोबान पेड़ों से निकलने वाली प्राकृतिक राल है। जहां पर कपूर हवा को फौरन महकाने और एनर्जी देने का काम करता है। वहीं गुग्गल और लोबान हवा की गहराई से सफाई करते हैं। लोबान को तनाव और मानसिक शांति को कम करने के लिए जाना जाता है। जबकि गुग्गल को वायुमंडल से हानिकार बैक्टीरिया को खत्म करने में सहायक होता है।
जब हम साथ में कपूर और गुग्गल जलाते हैं, तो इससे निकलने वाला धुआं एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर होता है। यह घर के कोनों में छिपे सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट कर देता है। जो सर्दी-खांसी और सांस संबंधी बीमारियों की वजह बनते हैं। खासकर मानसून और बदलते मौसम में इसका इस्तेमाल 'एयर प्यूरीफायर' की तरह काम करता है।
वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर के कुछ कोनों में ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है। इससे कलह और आर्थिक तंगी महसूस होने लगती है। शाम के समय जब दिन और रात मिल रहे होते हैं, तो पीतल के बर्तन या मिट्टी के दीपक में कपूर जलाकर उस पर थोड़ा सा लोबान और गुग्गल डालें। इसका धुआं पूरे कमरे में खासकर अलमारियों के पीछे और अंधेरे कोने में दिखाना चाहिए। माना जाता है इस धुएं की सुगंध से घर की 'बुरी नजर' और निगेटिव वाइब्स फौरन बाहर निकल जाती हैं।
सबसे पहले दो भीमसेनी शुद्ध कपूर लें। इसको जलाकर उस पर पिसा हुआ गुग्गल और लोबान डालें। ध्यान रखें कि धुआं ज्यादा न हो, बस हल्की सुगंध और हल्की धुंध घर में फैलनी चाहिए। इसको जलाने के बाद थोड़ी देर के लिए खिड़कियां खोल दें, जिससे कि घर में शुद्ध हवा का संचार हो सके।