By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 28, 2026
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के आवंटन वाली कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (सीएमपीएस) को मंजूरी दी। यह योजना वित्त वर्ष 2039-40 तक लागू रहेगी। आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य कंटेनर के आयात पर निर्भरता कम करना और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।
यह योजना वित्त वर्ष 2039-40 तक लागू रहेगी। योजना के तहत पात्र विनिर्माताओं को ब्याज सब्सिडी, परिचालन व्यय सहायता, परीक्षण एवं प्रमाणन सहायता तथा भूमि पट्टे पर लेने के लिए सहायता दी जाएगी। बयान के मुताबिक, ब्याज सब्सिडी सहायता के लिए 859 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
इसके तहत नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा इकाइयों की क्षमता बढ़ाने के लिए लिए गए पात्र सावधि ऋण पर सालाना तीन प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, परिचालन व्यय सहायता के लिए 8,891 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके तहत वैश्विक नौवहन मानकों के अनुरूप निर्मित और पात्र विनिर्माताओं द्वारा बेचे गए कंटेनर पर वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इससे घरेलू स्तर पर निर्मित कंटेनर की लागत संबंधी कमी दूर करने और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। योजना का लक्ष्य देश की सालाना कंटेनर विनिर्माण क्षमता को करीब 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख टीईयू (20 फुट के बराबर कंटेनर) तक पहुंचाना है। सरकार ने कहा कि इस योजना से भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण आधार विकसित होगा और देश गुणवत्तापूर्ण नौवहन कंटेनर के वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में उभर सकेगा।
इससे करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है। इसके अलावा, कंटेनर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विशेष इस्पात, कोने के हिस्से बनाने वाली ढलाई, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।