By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 29, 2026
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने ओडिशा में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के तहत परियोजनाओं की मंजूरी और उनके क्रियान्वयन में कई खामियों को उजागर किया है। इन फाउंडेशन का उद्देश्य राज्य के खनन प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के हित एवं लाभ के लिए काम करना है। सोमवार को ओडिशा विधानसभा में पेश की गई अपनी एक रिपोर्ट में कैग ने जांच के लिए चुने गए खनन क्षेत्रों और कार्य प्रभागों में जिला खनिज फाउंडेशन के अंशदान के आकलन, संग्रह और निगरानी में महत्वपूर्ण व्यवस्थागत कमियों को उजागर किया।
हालांकि, इन छह में से किसी भी डीएमएफ ने परिप्रेक्ष्य योजना और मास्टर प्लान तैयार नहीं किया। जिन छह जिलों का लेखा परीक्षण किया गया, उनमें सुंदरगढ़, क्योंझर, जाजपुर, मयूरभंज, ढेंकानाल और नबरंगपुर शामिल हैं। लेखा परीक्षण के लिए चुने गए छह डीएमएफ में से मयूरभंज, ढेंकानाल और नबरंगपुर जिलों ने वर्ष 2015 से 2024 के दौरान अतिरिक्त डीएमएफ धनराशि के लिए ‘फ्लेक्सी डिपॉजिट/ऑटो स्वीप’ खाते का विकल्प नहीं चुना।
इसके परिणामस्वरूप 9.49 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ। इसी तरह, क्योंझर डीएमएफ को 84.51 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ। कैग ने कहा कि जाजपुर, क्योंझर और सुंदरगढ़ जिलों के डीएमएफ से 171.79 करोड़ रुपये की धनराशि मनरेगा निदेशक को रोजगार मांगने वाले लोगों को अतिरिक्त मजदूरी के भुगतान के लिए जारी की गई, जो ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
उसने कहा कि जाजपुर, क्योंझर और सुंदरगढ़ डीएमएफ में परियोजनाओं के क्रियान्वयन के बाद कार्यान्वयन एजेंसियों ने 470.25 करोड़ रुपये की अप्रयुक्त राशि और उस पर अर्जित 26.51 करोड़ रुपये के ब्याज को डीएमएफ को वापस नहीं किया। इसी तरह, ढेंकानाल और मयूरभंज की कार्यान्वयन एजेंसियों ने क्रमशः अपने संबंधित डीएमएफ को 87 लाख रुपये का अर्जित ब्याज वापस नहीं किया था। लेखा परीक्षा में यह भी पाया गया कि सुंदरगढ़ में डीएमएफ की धनराशि से हॉकी स्टेडियम के निर्माण पर 136.77 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना योजना के दिशा-निर्देशों के तहत अनुमत गतिविधियों में शामिल नहीं है। कैग ने बताया कि कोविड महामारी के दौरान सुंदरगढ़ डीएमएफ से राउरकेला के एक निजी अस्पताल को 98.85 करोड़ रुपये के आवश्यक भुगतान के मुकाबले 109.45 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 10.60 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। लेखा परीक्षक ने ओडिशा सरकार को सलाह दी कि वह नियमों के प्रावधानों के अनुसार डीएमएफ की धनराशि का उचित लेखा-जोखा सुनिश्चित करे और कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा उस पर अर्जित ब्याज की राशि वापस कराए।
कैग ने सिफारिश की है कि राज्य सरकार मंजूर की गई परियोजनाओं को समय पर पूरा कराए, वित्त वर्ष के भीतर जारी धनराशि का पूरी तरह इस्तेमाल हो और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा कराए जाएं।