Calcutta High Court का आदेश, Milan Pradhan को नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने दिया जाए

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 24, 2026

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को दोहराया कि गिरफ्तार कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम उपचुनाव में उचित तरीके से चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए। अदालत ने कहा कि निचली अदालत द्वारा जिस मामले में उन्हें सात अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, उसमें उन्हें गिरफ्तार नहीं माना जाएगा। नंदीग्राम में उपचुनाव छह अक्टूबर को होना है और चुनाव प्रचार चार अक्टूबर को समाप्त होगा।

अदालत ने कहा, ‘‘यह जानकर हैरानी होती है कि यह आपराधिक मामला 2007 का है और जांच अधिकारी ने 19 सितंबर को याचिकाकर्ता को ‘गिरफ्तार दिखाने’ के लिए आवेदन दिया।’’ न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार से मौखिक रूप से कहा कि प्रधान को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए। अदालत ने 22 सितंबर को भी मौखिक रूप से पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से कहा था कि यदि कांग्रेस उम्मीदवार उन पांच आपराधिक मामलों में जमानत हासिल कर लेते हैं, जिनमें उन्हें गिरफ्तार किया गया है, तो उन्हें नंदीग्राम उपचुनाव उचित तरीके से लड़ने दिया जाए। अदालत ने कहा कि प्रधान को 22 सितंबर के बाद खेजुरी थाने में दर्ज मामले में गिरफ्तार दिखाया गया।

प्रधान के वकील अयान भट्टाचार्य की दलील पर अदालत ने सवाल किया कि इस अदालत के 22 सितंबर के आदेश के बाद याचिकाकर्ता को एक और मामले में आरोपी क्यों बनाया गया, जबकि राज्य सरकार ने कहा था कि उनके खिलाफ पांच ही आपराधिक मामले लंबित हैं। पूर्बा मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम और खेजुरी थानों में 2007 में प्रधान के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। प्रधान की ओर से छह अन्य मामलों में दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण मांगने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान 22 सितंबर को कलकत्ता उच्च न्यायालय को राज्य की ओर से बताया गया था कि इनमें से पांच मामले पिछली सरकार ने वापस ले लिये थे और छठे मामले में उनकी जरूरत नहीं थी।

अदालत को यह भी बताया गया था कि प्रधान को अन्य पांच आपराधिक मामलों में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि जब राज्य सरकार ने कहा था कि किसी अन्य मामले में उनकी जरूरत नहीं है, तो उन्हें किसी और मामले में नहीं जोड़ा जाना चाहिए। प्रधान के वकील अयान भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें खेजुरी थाने के 2007 के मामला संख्या 45 की जानकारी नहीं थी, और इसलिए 22 सितंबर को अदालत के समक्ष इसका उल्लेख नहीं किया गया।

अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि 19 सितंबर को कांथी एसीजेएम अदालत ने खेजुरी थाना मामले में प्रधान के खिलाफ पेशी वारंट जारी किया था, जिसमें उनपर हत्या, हत्या के प्रयास और भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। मजूमदार ने कहा कि पिछली सरकार ने 2020 में उन छह मामलों को वापस ले लिया था, जिनमें प्रधान को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन एक जनहित याचिका पर अदालत ने 2021 में इन मामलों को फिर से बहाल करने का आदेश दिया था, क्योंकि ये हत्या के आरोपों से जुड़े थे। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने अतिरिक्त महाधिवक्ता से पूछा कि यदि गिरफ्तारी वारंट लंबित था तो जांच अधिकारी अब तक क्या कर रहे थे।

अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि पिछली सरकार ने इन मामलों में कार्रवाई नहीं की थी। प्रधान ने अपने खिलाफ दर्ज चार आपराधिक मामलों में पहले ही जमानत याचिका दायर कर दी है। प्रधान के वकील ने कहा कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष यह कहा था कि प्रधान के खिलाफ 11 मामलों के अलावा कोई अन्य मामला नहीं है, इसके बावजूद उन्हें एक अन्य मामले में गिरफ्तार दिखाकर निचली अदालत में पेश किया गया और हिरासत की मांग की गई।

उन्होंने कहा कि खेजुरी थाना मामले में पेशी वारंट के बारे में अभियोजन पक्ष ने उच्च न्यायालय को जानकारी नहीं दी। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि ऐसा आदेश पारित किया जाए कि राज्य किसी अन्य मामले में कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा। प्रधान के खिलाफ दर्ज मामले 2007 में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार द्वारा नंदीग्राम और खेजुरी में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुए हिंसक आंदोलन से जुड़े हैं।

पुलिस ने कहा कि लंबित मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, हत्या के इरादे से अपहरण, सबूत मिटाना, घर में घुसना, हथियारों के साथ दंगा और शस्त्र अधिनियम के तहत अपराधों के आरोप शामिल हैं। प्रधान की गिरफ्तारी 18 सितंबर को उस समय हुई थी, जब ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि तृणमूल कांग्रेस का उनका गुट नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा। इससे पहले उनकी पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान ने चुनाव से नाम वापस ले लिया था।

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