By अंकित सिंह | Nov 28, 2023
प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष की ओर से हो रहे हमलों के मुद्दे पर चर्चा की गयी। इस दौरान प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि लोकतंत्र में इस बात में कुछ गलत नहीं है कि कोई राजनीतिज्ञ किसी अन्य राजनीतिज्ञ की नीति और विचारधारा से सहमत नहीं हो और उस आधार पर उसे नापसंद करे और उसका विरोध करे लेकिन देश के प्रधानमंत्री पद पर जो व्यक्ति बैठा है उसके खिलाफ अमर्यादित बातें कहना सर्वथा अनुचित है। इसके अलावा जिस तरह प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात को निशाना बनाया जा रहा है वह तो और भी गलत है। एक राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह कहना एक राज्य के प्रति नफरत फैलाने के समान है कि अगर क्रिकेट विश्व कप का फाइनल मैच कोलकाता या मुंबई में खेला जाता तो भारत जीत जाता।
नीरज दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री पद के गरिमा होती हैं और इसको लेकर अगर आप पनौती और जेबकतरा जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो यह वाकई देश की राजनीति के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को किसी भी कीमत पर इस तरह के भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि उनके परिवार से तीन लोग प्रधानमंत्री रह चुके हैं और उन्हें प्रधानमंत्री पद की गरिमा का पता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से राहुल गांधी ने जब खतरा और पनौती जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, उससे साफ तौर पर जाहिर होता है कि वह प्रधानमंत्री पद पाने के लिए आतुर तो जरूर है लेकिन उनके मन में इस पद के लिए कोई सम्मान नहीं है। नीरज दुबे ने यह भी उदाहरण दिया कि राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार द्वारा ले गए विधेयक को भी फाड़ दिया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आप लगातार अपशब्दों का इस्तेमाल करते रहते हैं और आपने 2019 का पूरा का पूरा चुनाव चौकीदार चोर है का नारा देकर लड़ा था। इससे जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री पद को लेकर आप गंभीर नहीं है।
इंडिया गठबंधन को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि यह फिलहाल अस्तित्व में नजर नहीं आ रहा है। हर पार्टी के अपने-अपने दांव हैं और शायद कांग्रेस पांच राज्यों के जो चुनावी नतीजे आएंगे उसके बाद कुछ अपना अलग प्लान करेगी। उन्होंने कहा अखिलेश यादव पहले ही इंडिया गठबंधन की ओर से जिन एंकरों को बैन किया गया था उनके प्रोग्राम में अपने प्रवक्ताओं को भेजने लगे हैं। वह लगातार कांग्रेस पर हमलावर है। नीतीश कुमार भी कांग्रेस से खुश नहीं है। उधर एमके स्टालिन भी एक अलग एक गणित बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ममता बनर्जी पहले भी नहीं चाहते थीं कि कांग्रेस से गठबंधन में हो। तो ऐसे भी इंडिया गठबंधन का अस्तित्व कहां बचा है। क्षेत्रीय दलों को इस बात की पूरी संभावना है कि कांग्रेस मजबूत हुई तो उनका आदर कमजोर हो सकता है।