जब कैप्टन अनुज नैय्यर का शव तिरंगे में लिपटा घर आया तो एक लड़की फूट-फूट कर रो रही, कौन थी वो?

By रेनू तिवारी | Jul 24, 2019

कैप्टन अनुज नैय्यर जाट रेजिमेंट की 17वीं बटालियन के एक भारतीय सेना अधिकारी थे, जिन्हें 1999 में कारगिल युद्ध में ऑपरेशन के दौरान युद्ध में अनुकरणीय वीरता के लिए मरणोपरांत महावीर चक्र (भारत का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार) दिया गया था। कारगिल युद्ध में शहीद वीर सपूतों के अदम्य साहस को याद करके आज भी सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। देश के वीर सपूतों में कैप्टन अनुज नैय्यर का नाम भी शामिल हैं। कैप्टन अनुज नैय्यर की बहादुरी ने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिये थे। कैप्टन अनुज नैय्यर के लिए हमेश पहले देश रहा उसके बाद कुछ और... आइये जानते हैं कारगिल युद्ध में शहीद कैप्टन अनुज नैय्यर की कहानी..

अनुज नैय्यर एक मेधावी छात्र थे। वह चाहते तो आसानी से टीचर, डॉक्टर या इंजीनियर बन सकते थे लेकिन अनुज ने देश की सेवा चुनी और आर्मी ज्वाइन की। 24 साल के अनुज नैय्यर की निजी जिंदगी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं थी। अनुज अपनी बचपन की दोस्त से बेहद प्यार करते थे और उनसे सगाई के लिए घर आने वाले थे, तभी भारत और पकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया और अनुज को जंग पर भेज दिया गया। टाइगर हिल के पश्चिम में पॉइंट 4875 को खाली कराने की जिम्मेदारी कैप्टन नय्यर को दी गई। टाइगर हिल को पूरी तरह से पाकिस्तानी घुसपैठियों ने घेर रखा था। 

इसे भी पढ़ें: राजनाथ बोले, अपने जवानों के गौरव और सम्मान की रक्षा के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करूंगा

पॉइंट 4875 हजारों फीट की ऊंचाई पर था। ऊपर से गिरा एक पत्थर भी अनुज की टीम के लिए जानलेवा था। पॉइंट 4875 को जीतना बेहद जरूरी था, हर एक कदम से जंग का रूख बदल सकता था। इसलिए अनुज को बल के साथ-साथ दिमाग भी चलाना था। कदम-कदम पर जान का खतरा लिए कैप्टन अपने साथियों के साथ आगे बढ़े। कैप्टन की योजना थी कि किसी भी तरह से पॉइंट 4875 को खाली करवाना है जिसके लिए वह साथियों के साथ दबे परों से आगे बढ़े.. दुश्मन को आहट हो गई किसी के आने की और उन्होंने अनुज की टीम पर हमला करना शुरू कर दिया। कैप्टन ने साथियों के साथ मिलकर पाकिस्तान के घुसपैठियों का जवाब दिया और अकेले ही पाकिस्तान के नौ घुसपैठियों को मार गिराया था। अनुज और उनके साथियों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे खदेड़ दिया। घायल कैप्टन अनुज नैय्यर ने मशीनगन बंकर को तबाह कर दिया था लेकिन विजय का तिरंगा फहराने के लिए वह आगे बढ़े तभी दुश्मनों ने ग्रेनेड से हमला कर दिया, अनुज नैय्यर बुरी तरह घायल हो गये। साथियों ने उन्हें आगे जाने से रोका लेकिन घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए आगे बढ़े तभी एक और विस्फोट हुआ और अनुज सहित उनकी पूरी टीम शहीद हो गई। पाकिस्तानी घुसपैठियों ने वापस आकर पॉइंट 4875 पर कब्जा करना चाहा लेकिन पीछे से दूसरी टीम के साथ कैप्टन बत्रा पहुंच चुके थे. उन्होंने उनका काम तमाम कर दिया और टाइगर हिल को जीतने के लिए आगे बढ़ चले। 

कहते हैं कि जब कैप्टन अनुज नैय्यर जंग पर जा रहे थे तो उन्होंने अपने सीनियर को एक अंगूठी दी थी और कहा था कि ये अंगूठी उनकी होने वाली मंगेतर को दे देंगे। सीनियर ने कहा कि तुम खुद देना जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि मैं जंग पर जा रहा हूं वापस लौटूंगा या नहीं। लौट आया तो खुद दे दूंगा वरना आप इसे मेरे घर भेज देना और मेरा संदेश दे देना। दुर्भाग्यवश इस जंग से अनुज वापस नहीं लौट सके। लेकिन वह पूरे देश के लिए मिसाल हैं। कैप्टन अनुज नैय्यर का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटा हुआ दिल्ली आया तो परिवार के साथ एक लड़की भी फूट-फूट कर रो रही थी वह सिमरन थी जिससे सगाई करने अनुज आने वाले थे।

यह भी देखें-

प्रमुख खबरें

IPO Market में जबरदस्त हलचल: अगले हफ्ते 5 कंपनियां जुटाएंगी ₹7,443 करोड़, Investors के लिए बड़ा मौका

Maruti Suzuki का ₹35,000 करोड़ का Investment Plan: 5 साल में 63 लाख कारों की बिक्री का है महा-लक्ष्य

Galle Test से पहले Team India में बड़ा फेरबदल, Sai Sudharsan की जगह Sarfaraz Khan को मिली जिम्मेदारी

Shubman Gill फिट, Yashasvi Jaiswal का जलवा, Sri Lanka के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया का दमदार प्रदर्शन