विजय दिवस स्पेशल: इस फौजी ने दिखाई थी असाधारण वीरता, शहीद होने से पहले पाक के 4 बंकरों को किया था तबाह

By अनुराग गुप्ता | Jul 24, 2021

नयी दिल्ली। कारगिल युद्ध के दौरान अदम्य साहस दिखाने वाले कैप्टन मनोज कुमार पांडेय की वीर गाथा को कोई भुला नहीं सकता है। उन्होंने देश के प्रति अपना फर्ज मरते दम तक निभाया और असाधारण वीरता का परिचय देते हुए मनोज पांडेय ने शहीद होने से पहले दुश्मनों के चार बंकरों को नेस्तानाबूत कर दिया था। 

मनोज कुमार पांडेय का जन्म उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता गोपी चंद पांडेय और माता मोहिनी पांडेय हैं। उनको देशप्रेम के प्रति प्रेरित करने का काम उनकी मां ने बचपन में ही शुरू कर दिया था और उन्हें देश के प्रति समर्पित गाथाएं सुनाई। सैनिक स्कूल से पढ़ाई करने वाले मनोज कुमार पांडेय ने एनडीए की परीक्षा दी थी और फिर एसएसबी में उनसे पूछा गया था कि आप सेना को क्यों ज्वाइन करना चाहते हैं। इस पर उन्होंने स्पष्ट जवाब देते हुए कहा कि मैं परमवीर चक्र हासिल करने के लिए सेना को ज्वाइन करना चाहता हूं। हालांकि मरणोपरांत उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित भी किया गया।मां भारती के गौरव की रक्षा में प्राणों की आहुति देने वाले लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय को दुश्मनों को खदेड़ने का काम सौंपा गया था। दरअसल, 1/11 गोरखा राइफल के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय सियाचिन से तीन महीने का अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद लौट रहे थे लेकिन तभी उनको कारगिल के बारे में जानकारी मिली और छुट्टी पर जाने की जगह वह सामने से नेतृत्व करने की बात कही थी। आपको बता दें कि उन्हें युद्ध के बीच में ही लेफ्टिनेंट से कैप्टन बनाया गया था।खालोबार फतह करने की मिली जिम्मेदारीपाकिस्तान सेना और घुसपैठियों ने भारतीय सीमाओं पर कब्जा करने की कोशिश की। लेकिन भारतीयों के हौसलों के आगे वो टिक नहीं सके। दो महीने तक चले कारगिल युद्ध में पाकिस्तानियों को मुंह की खानी पड़ी। हम इसी युद्ध के दौरान असाधारण वीरता दिखाने वाले मनोज कुमार पांडेय का जिक्र कर रहे हैं। 

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कर्नल ललित राय के नेतृत्व में लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय को खालोबार फतह करने की जिम्मेदारी मिली। तब मनोज पांडेय ने अपनी पलटन को लेकर पाकिस्तानियों पर धावा बोल दिया। 3 जुलाई 1999 को वीरगति को प्राप्त होने से पहले उन्होंने दुश्मनों के चार बंकरों को नेस्तानाबूत कर दिया।

गोलियों से छलनी मनोज कुमार पांडेय के आखिरी शब्द थे ना छोड़नूं, जिसका मतलब होता है कि किसी को भी मत छोड़ना। बोलते हुए पाकिस्तान के बंकर पर ग्रेनेड फेंका था। मनोज कुमार पांडेय के इसी असाधारण वीरता के लिए भारत का बड़ा वीरता सम्मान दिया गया। जिसे पाने के लिए उन्होंने भारतीय सेना को ज्वाइन किया था।

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