UP में जाति आधारित रैलियों पर प्रतिबंध, FIR और अरेस्ट मेमो में भी नहीं बताई जाएगी किसी की कास्ट

By अभिनय आकाश | Sep 22, 2025

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों पर अमल करते हुए, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार नेराज्य में जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के उद्देश्य से पुलिस रिकॉर्ड, सार्वजनिक स्थानों, आधिकारिक प्रारूपों और वाहनों से जाति-आधारित संदर्भों को हटाने का आदेश दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने एक आधिकारिक आदेश में सभी राज्य विभागों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गिरफ्तारी ज्ञापन, प्राथमिकी या किसी अन्य पुलिस दस्तावेज़ में जातियों का उल्लेख न हो। आदेश में यह भी निर्देश दिया गया है कि पुलिस नोटिसबोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड पर प्रदर्शित जाति-आधारित संदर्भों को भी हटा दिया जाए।

इसे भी पढ़ें: न्याय की रीढ़ पर वार: क्यों जरूरी है अधिवक्ता संरक्षण कानून

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 16 सितंबर के अपने आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार को पुलिस रिकॉर्ड में किसी व्यक्ति की जाति का उल्लेख करने की प्रथा को रोकने का निर्देश दिया। न्यायालय ने इस प्रथा को कानूनी भ्रांति करार देते हुए कहा कि यह संवैधानिक नैतिकता को कमजोर करती है और संवैधानिक लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकती है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों की जाति माली, पहाड़ी, राजपूत, ठाकुर, पंजाबी पाराशर और ब्राह्मण के रूप में दर्ज करने से कोई वैध या उचित उद्देश्य पूरा नहीं होता। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि विभागीय जाँच की सिफ़ारिश करने या अधिकारी को संवैधानिक नैतिकता और सामाजिक सरोकारों के बारे में जागरूक करने के बजाय, उनके आचरण का बचाव अस्पष्ट और असंतुलित आधारों पर किया गया।

प्रमुख खबरें

पासपोर्ट बनवाना हो गया महंगा... नॉर्मल कैटेगरी ₹2,500 और तत्काल में ₹5,000, साल 2012 के बाद फीस में हुआ बड़ा बदलाव

Investors की सुरक्षा के लिए SEBI का नया ड्राफ्ट, अब Social Media Influencers की भी होगी जवाबदेही।

भारत के साथ Partnership को लेकर उत्साहित, Pax Silica Summit में बोले US अंडर सेक्रेटरी Jacob Helberg

Solan को CM Sukhu की सौगात, 20 करोड़ से बदलेगी Kasauli की तस्वीर, महिलाओं को Pension का तोहफा