CBI ने NEET Paper Leak मामले में NTA के 3 विशेषज्ञों पर तय किए गंभीर आरोप, उम्रकैद की सजा संभव

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 07, 2026

नयी दिल्ली, सात अगस्त केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली की एक अदालत को बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञों ने ‘‘गोपनीयता की जिम्मेदारी’’ का उल्लंघन किया और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-स्नातक (यूजी) के प्रश्नपत्र प्रसारित किए। आरोपपत्र में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए प्रावधानों के तहत प्रत्येक को उम्रकैद की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाते समय उन्हें ‘‘लोकसेवक’’ माना क्योंकि उन्हें ‘‘गोपनीय’’ संपत्ति यानी प्रश्नपत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। सीबीआई के आरोपपत्र के अनुसार, जीव विज्ञान विषय की विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंडहरे, रसायन विज्ञान विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी और भौतिक विज्ञान विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार ने ‘‘गोपनीयता प्रमाणपत्र’’ पर हस्ताक्षर किए थे। आरोपपत्र के मुताबिक, तीनों विशेषज्ञों ने एनटीए द्वारा आयोजित किसी भी प्रवेश परीक्षा की कोचिंग से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े नहीं होने की घोषणा की थी।

उन्होंने यह भी कहा था कि प्रश्न या प्रश्नपत्र को वे स्वयं लिखेंगे या टाइप नहीं करेंगे, प्रश्नपत्र उनके पास रहने के दौरान सुरक्षित ताले में रखे जाएंगे तथा वे प्रश्नों से संबंधित कोई नोट, प्रति या प्रारूप अपने पास नहीं रखेंगे। सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट में कहा गया कि गोपनीयता की जिम्मेदारी के बावजूद जांच में सामने आया कि मंडहरे ने पुणे स्थित अपने आवास पर कोचिंग कक्षाएं चलाईं, कुलकर्णी ने परीक्षा से कुछ समय पहले अपने आवास व पुणे में अभ्यर्थियों के लिए ‘‘विशेष कक्षाएं’’ आयोजित कीं, जबकि हवलदार ने खुद व अपने सहयोगियों के माध्यम से गोपनीय प्रश्नपत्रों को ‘‘प्रसारित’’ किया। अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, जांच में पता चला कि मनीषा संजय हवलदार को भौतिक विज्ञान से संबंधित गोपनीय कार्य सौंपा गया था और वह गोपनीयता संबंधी शपथ-पत्र से बंधी थीं, इसके बावजूद वह स्वयं या अपने संपर्क में रहे लोगों के माध्यम से परीक्षा से पहले भौतिक विज्ञान के प्रश्नों को लीक करने और प्रसारित करने में शामिल थीं।

रिपोर्ट में बताया गया कि हवलदार ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से ऐसी सामग्री भेजी, लीक हुए प्रश्नों के नोट्स की छपाई व आपूर्ति में मदद की, सह-आरोपियों से संपर्क रखा और कथित तौर पर आर्थिक लाभ के लिए यह काम किया। सीबीआई ने तीनों विशेषज्ञों के खिलाफ लोकसेवक द्वारा आपराधिक कदाचार किए जाने से संबंधित भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने यह कानून इसलिए लगाया क्योंकि तीनों को एनटीए ने ‘‘विषय विशेषज्ञ’’ के रूप में नियुक्त किया था और उन्हें गोपनीय सामग्री यानी प्रश्नपत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इस भूमिका में उन्हें ‘‘लोकसेवक’’ माना गया। इस अधिनियम के तहत तीनों आरोपियों को अधिकतम 10 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है। वहीं, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5) के तहत आने वाले अपराधों में सबसे कड़ी सज़ा किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा विश्वासघात किए जाने पर है, जिसमें अधिकतम दंड आजीवन कारावास है।

सीबीआई ने इन तीनों विशेषज्ञों पर लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के प्रावधान भी लगाए हैं। इसमें संगठित तरीके से पेपर लीक करने का आरोप भी शामिल है, जिसके लिए कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की सज़ा तथा कम से कम एक करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है।

प्रमुख खबरें

NDRF की नई टीमें तैनात करने का लंबित प्रस्ताव जल्द मंजूर करे सरकार: संसदीय समिति

Atiq Ahmed के बेटों को Allahabad High Court से मिली पेरोल, अबान के जनाजे में होंगे शामिल

Meta टीम से सरकार ने Deepfake और AI कंटेंट पर ठोस कदम उठाने की रिपोर्ट मांगी

Chhattisgarh के Rajnandgaon में EMC 2.0 को केंद्र से मंजूरी, ₹3000 करोड़ का होगा निवेश