By अनन्या मिश्रा | Apr 14, 2026
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा स्टूडेंट्स के हित में एक बड़ा फैसला लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले के मुताबिक अपने सभी जुड़े हुए स्कूलों को पीरियड्स से जुड़ी हाइजीन मैनेजमेंट पर नई गाइडलाइंस का पालन करने का निर्देश दिया है। कोर्ट द्वारा 20 जनवरी 2026 के फैसले को शेयर करने के बाद शिक्षा मंत्रालय द्वारा यह निर्देश आया है। इसमें संविधान के आर्टिकल 21 के तहत पीरियड्स से जुड़ी हेल्थ को सम्मान के अधिकार का एक जरूरी हिस्सा माना गया है।
बता दें कि स्कूलों को सैनिटरी कचरे के डिस्पोजल के लिए सही सिस्टम को अपनाए जाने का निर्देश दिया गया है। वहीं NCERT और SCERT की गाइडलाइंस के मुताबिक पीरियड्स की प्यूबर्टी और सेहत पर अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने होंगे। इसके अलावा जेंडर के मुताबिक खुली और सेंसिटिव बातचीत को बढ़ावा देना होगा।
इसके साथ ही जवाबदेही पक्की करने के लिए CBSE ने इन तरीकों को लागू करने और साथ ही नजर बनाए रखने के लिए डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर्स को समय-समय पर इंस्पेक्शन करना होगा। 31 मार्च और 30 अप्रैल 2026 तक स्कूलों को एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए मंथली कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी 2026 को दिए अपने आदेश में कहा था कि मासिक धर्म के दौरान छात्राओं की सुवधाएं और स्वच्छता उनका मौलिक अधिकार है। कोर्ट द्वारा यह साफ कर दिया गया है कि अगर किसी स्कूल में इसकी सुविधा नहीं होगी, तो इसका असर छात्रा के आत्मविश्वास के साथ-साथ पढ़ाई पर भी पड़ेगा।