Pahalgam Terror Attack की पहली बरसी से पहले अचानक LoC पहुँचे CDS Anil Chauhan, पूरे J&K में सुरक्षा कड़ी

By नीरज कुमार दुबे | Apr 06, 2026

कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी जैसे जैसे नजदीक आ रही है, वैसे वैसे घाटी की हवा में एक नया संदेश साफ सुनाई दे रहा है कि अब की बार ऐसा जवाब और इंतजाम ऐसा होगा कि दुश्मन की हर साजिश जड़ से खत्म कर दी जाए। हम आपको बता दें कि कश्मीर घाटी में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं और जमीन से लेकर आसमान तक चौकसी का जाल इस तरह बिछाया गया है कि आतंकी संगठन अब कदम रखने से पहले सौ बार सोचें।

जनरल चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि अब अलग अलग मोर्चों पर काम करने का दौर खत्म हो चुका है। सेना, वायुसेना, नौसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां एकीकृत ढांचे में काम करेंगी। यह समन्वय ही वह ताकत बनेगा जो आतंक के हर नेटवर्क को तोड़ देगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आने वाले खतरों से निपटने के लिए तकनीक, मानसिक मजबूती और सामूहिक तैयारी अनिवार्य है। रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि सीडीएस ने शनिवार को उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सुरक्षा और संचालनात्मक तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया। रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि जनरल चौहान ने सेना की चिनार कोर इकाई के अंतर्गत आने वाले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि सीडीएस ने अपने दौरे में उत्तरी कश्मीर स्थित नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा परिदृश्य और अभियानगत तैयारियों की समीक्षा की तथा बल की अनुकरणीय परिचालन तत्परता, सैद्धांतिक सामंजस्य और दृढ़ पेशेवर रुख की सराहना की। प्रवक्ता ने बताया कि बारामूला में सीडीएस को भविष्य में बल प्रयोग और प्रौद्योगिकी के समावेश के बारे में जानकारी दी गई।

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जनरल चौहान ने चिनार कोर के अधिकारियों को संबोधित करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि युद्ध के तरीके बदल रहे हैं, जिसके लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर एक मजबूत और एकीकृत व्यवस्था पर आधारित ‘बहु विषयक ऑपरेशन्स’ (एमडीओ) की ओर बदलाव की आवश्यकता है। सीडीएस ने बाद में बारामूला में नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधियों, प्रतिष्ठित व्यक्तियों और पदाधिकारियों से बातचीत की तथा राष्ट्र निर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। हम आपको बता दें कि भारतीय सेना ने साफ कर दिया है कि आने वाला समय बहु आयामी संचालन का है, जिसमें जमीन, हवा, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष और मानसिक स्तर तक एक साथ जवाब दिया जाएगा।

इसी के साथ जमीन पर भी कार्रवाई तेज कर दी गई है। जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में संदिग्ध गतिविधियों के बाद शुरू हुआ तलाशी अभियान इस बात का प्रमाण है कि हर सूचना को गंभीरता से लिया जा रहा है। एक स्थानीय निवासी की सूचना के आधार पर तीन संदिग्धों की तलाश में सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त अभियान चलाया। भले ही अभी तक आमना सामना नहीं हुआ हो, लेकिन यह स्पष्ट है कि सुरक्षा बल किसी भी जोखिम को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं हैं।

हम आपको बता दें कि पहलगाम हमले की बरसी से पहले घाटी में अतिरिक्त बलों की तैनाती, निगरानी उपकरणों का विस्तार और खुफिया तंत्र को और तेज किया गया है। सीमाओं पर घुसपैठ रोकने के लिए नियंत्रण रेखा पर विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। ड्रोन, सेंसर और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर हर हरकत पर नजर रखी जा रही है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब युद्ध की परिभाषा बदल रही है और भारत इस बदलाव के केंद्र में खुद को स्थापित कर रहा है। तकनीक आधारित युद्ध, संयुक्त संचालन और राष्ट्रव्यापी सहयोग की अवधारणा यह दिखाती है कि आने वाले समय में भारत केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं बल्कि पहल करने वाला देश बनेगा।

बहरहाल, पहलगाम हमले की बरसी केवल एक स्मृति नहीं बल्कि एक संकल्प का क्षण बनती जा रही है। यह संकल्प है कि अब कोई चूक नहीं होगी, कोई ढिलाई नहीं होगी और हर हमले का जवाब इतना सख्त होगा कि आने वाली पीढ़ियां उसे याद रखेंगी।

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