By अंकित सिंह | Oct 17, 2026
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 17 अक्टूबर को 1990 के जनगणना नियमों में किए गए संशोधनों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 2027 की जनगणना के लिए गणना करने वालों (एन्यूमरेटर्स) के दायरे को बढ़ाने से आरएसएस और भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं को फायदा होगा। रमेश ने कहा कि यह साफ है कि यह आरएसएस/भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं के लिए एक 'रोजगार गारंटी योजना' है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अब जनगणना 2027 के लिए योग्य गणनाकारों (enumerators) की सूची का विस्तार कर दिया है। इसके पीछे काफी गड़बड़ी है। 10-12 जुलाई 2026 के दौरान, RSS ने बेलगाम में अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था, जिसका एकमात्र एजेंडा 'जनगणना 2027' था। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 26 मई 2026 को गठित 'जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च-स्तरीय समिति' ने अभी हाल ही में देश में जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर जनता (जिसमें भारतीय और विदेशी संगठन भी शामिल हैं) से सुझाव मांगे हैं। इस समिति में 'उच्च-स्तरीय' बस एक ही बात है - इसके सदस्यों का RSS इकोसिस्टम से जुड़ा होना। इसलिए, हमें पता है कि ये सुझाव कहां से आने वाले हैं।
रमेश ने आगे आरोप लगाया कि इस संशोधन से 2027 की जनगणना की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इसमें भी 'सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना' (SIR) की तरह ही हेरफेर की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले से ही खराब हो चुकी जनगणना और भी ज्यादा दूषित हो जाएगी। एक और संस्था को बर्बाद किया जा रहा है। SIR की तरह, जनगणना में भी खतरनाक तरीके से छेड़छाड़ की जाएगी। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी की कुटिल योजनाओं की कोई सीमा नहीं है। यह टिप्पणी केंद्र सरकार द्वारा 16 अक्टूबर को 1990 के जनगणना नियमों में किए गए उस संशोधन के बाद आई है, जिसके तहत जनगणना करने वालों (एन्यूमेरेटर) के दायरे को बढ़ा दिया गया है। अब इसमें सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, सरकारी अधिकारी, क्लर्क और अन्य लोगों को भी शामिल किया गया है।