By नीरज कुमार दुबे | Mar 30, 2026
भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने आज लोगों से जनगणना करने वालों को सही जानकारी देने की अपील करते हुए आश्वस्त किया कि व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहेगा तथा इसे किसी साक्ष्य या किसी योजना का लाभ लेने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत सभी व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रहती है। हम आपको बता दें कि दिल्ली समेत देश के कुछ राज्यों में अप्रैल में 16वीं जनगणना का पहला चरण शुरू होने से पहले संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि दिल्ली में जनगणना 16 अप्रैल से 15 मई तक आयोजित की जाएगी।
मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि पहली बार स्व-गणना की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसमें लोग जनगणना के पहले चरण (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना) से पहले 15 दिनों की अवधि में डिजिटल रूप से अपनी जानकारी जमा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “पहले डेटा कागज पर एकत्र किया जाता था, जिससे डिजिटलीकरण में काफी समय लगता था। अब शुरुआत से ही डिजिटल डेटा मिलेगा, इसलिए हम बहुत जल्दी डेटा जारी कर सकेंगे। कई डेटा सेट 2027 में ही प्रकाशित किए जाएंगे।” मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि यह सुविधा केवल देश में रहने वाले लोगों के लिए उपलब्ध होगी, विदेश में रहने वालों के लिए नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान किसी भी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी।
आयुक्त ने यह भी बताया कि डेटा मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्र किया जाएगा, और एक वेब पोर्टल जनगणना और हाउस लिस्टिंग की विभिन्न गतिविधियों की निगरानी व प्रबंधन करेगा। डेटा की सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डेटा सेंटरों को ‘क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ घोषित किया गया है। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के अद्यतन को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इसका चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से कोई संबंध नहीं है।