By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 02, 2026
अहमदाबाद, दो अक्टूबर गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारियों के. राजेश और गौरव दहिया को केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने उनकी सेवा संबंधी रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद समय से पहले सेवानिवृत्त कर दिया है। सरकार के शीर्ष सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डीओपीटी ने गुजरात कैडर के 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी राजेश और 2010 बैच के आईएएस अधिकारी गौरव दहिया को समय से पहले सेवानिवृत्त करने का फैसला किया है।
सीबीआई के अनुसार, राजेश ने अपात्र लोगों को शस्त्र लाइसेंस मंजूर करने, अयोग्य लाभार्थियों को सरकारी जमीन आवंटित करने और सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण को नियमित करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत ली थी। सीबीआई की हिरासत के बाद राजेश को साबरमती केंद्रीय जेल में रखा गया था। अगस्त 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत के आदेश के बाद उन्हें हिरासत में लिया, जब उसने सीबीआई के मामले के आधार पर अलग से जांच शुरू की।
बाद में सीबीआई ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने, सरकारी जमीन आवंटित करने और अन्य आरोपों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में राजेश के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। गिरफ्तारी के समय राजेश गांधीनगर में सामान्य प्रशासन विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे।
गिरफ्तारी के बाद गुजरात सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। दिल्ली की एक महिला द्वारा दो शादियां करने, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाए जाने के बाद दहिया को अगस्त 2019 में निलंबित कर दिया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि दहिया ने पहले से विवाहित होने की बात बताए बिना फरवरी 2018 में उससे शादी की थी।
महिला ने उन पर प्रताड़ित करने और निजी तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करने का भी आरोप लगाया था। दहिया ने इन आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि महिला ने उन्हें ‘‘मोहपाश’’ में फंसाया तथा ब्लैकमेल कर रही थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शादी की बताई जा रही तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई थी।
गुजरात सरकार ने आरोपों की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की थी, जबकि महिला की शिकायत मिलने के बाद गांधीनगर पुलिस ने अलग से जांच की। इसके बाद जुलाई 2023 में दहिया को बहाल कर दिया गया और गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त नियुक्त किया गया। सूत्रों ने बताया कि दोनों अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त करने का फैसला केंद्र द्वारा उनके सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद लिया गया।