By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 07, 2026
कोच्चि, सात अक्टूबर केंद्र सरकार ने बुधवार को केरल उच्च न्यायालय को बताया कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत केरलम में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने के प्रस्ताव को अब तक किसी भी बजट घोषणा में शामिल नहीं किया गया है। केंद्र ने मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी. एम. की पीठ को यह भी बताया कि पीएमएसएसवाई को पांच और वर्षों के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव फिलहाल अंतर-मंत्रालयी विचार-विमर्श के चरण में है। दो जनहित समूहों द्वारा कासरगोड या कोट्टयम में एम्स स्थापित करने की मांग को लेकर दायर दो याचिकाओं के जवाब में केंद्र ने दाखिल हलफनामे में कहा, ‘‘नये एम्स की स्थापना से जुड़ा कोई भी फैसला योजना को जारी रखने की मंजूरी मिलने और इसके लिए धन आवंटित किए जाने के बाद ही लिया जा सकता है।’’ केंद्र ने कहा, ‘‘इसके बाद, नीतिगत निर्णय के अनुरूप संबंधित प्रस्ताव को मंत्रिमंडल के विचार के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।’’ पीठ ने कहा कि केरलम में एम्स स्थापित करने का प्रस्ताव 2016 से केंद्र के पास लंबित है और निर्देश दिया कि राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस पर बिना और किसी देरी के फैसला किया जाए।
उसने कहा, ‘‘इसके अलावा, योजना के चरण पांच-ए के तहत 2017 में तिरुवनंतपुरम स्थित श्री चित्रा तिरुनाल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एससीटीआईएमएसटी) को 170 बिस्तरों की सुविधा वाले सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के निर्माण के जरिये उन्नत किया गया।’’ केंद्र ने कहा कि इन सुविधाओं ने राज्य में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। केंद्र सरकार ने आगे कहा कि केरलम सरकार ने 2014 से एम्स की स्थापना के लिए चार स्थानों- कोझिकोड, तिरुवनंतपुरम, कोट्टयम और एर्नाकुलम जिलों- की पहचान की थी तथा 2025 में प्रमुख चिकित्सा संस्थान की स्थापना के लिए कोझिकोड के किनालूर को अपनी पसंद बताया था। केंद्र ने हलफनामे में कहा, ‘‘इस मामले में 2019 और 2020 में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय से परामर्श किया गया था।
हालांकि, पीएमएसएसवाई के तहत केरलम में एम्स की स्थापना के प्रस्ताव को अब तक किसी भी बजट घोषणा में शामिल नहीं किया गया है।